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नागपुर जिले में बाल विवाह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 2025–26 में ही 13 मामले रोके गए

– बाल विवाह पर जिला प्रशासन की सख्ती : पांच साल में 45 शादियाँ रुकवाईं, 5 पर दर्ज हुए अपराध

नागपुर :- जिला बाल संरक्षण विभाग की सतर्कता के कारण पांच वर्षों में 45 बाल विवाहों को रोका गया. 2०25 तक 13 बाल विवाहों को रोका जा सकता था. 5 मामलों में आपराधिक मामले दर्ज किए गए.

बाल विवाह एक आपराधिक अपराध है. विवाह के लिए लडक़े की आयु 21 वर्ष और लडक़ी की आयु 18 वर्ष होनी चाहिए. इससे पहले विवाह करना अपराध है. यदि कानून का उल्लंघन होता है, तो लडक़े के पिता, मध्यस्थ, सजावट के मालिक, बैंड वादक, घुड़सवार, भोजन की व्यवस्था में शामिल रसोइये और विवाह में शामिल होने वाले अतिथि सभी बाल विवाह के दोषी ठहराए जा सकते हैं.

अरेंज मैरिज में शामिल होने से पहले दूल्हा और दुल्हन की उम्र जानना बहुत जरूरी है. बाल विवाह में शामिल होना मुसीबत को न्योता देने जैसा है. बाल विवाह सिर्फ ग्रामीण इलाकों में ही नहीं, बल्कि शहरी इलाकों में भी हो रहे हैं.

बाल विवाह कानून को लेकर प्रशासन की चेतावनी

नागपुर जिले में रोके गए आधे से अधिक बाल विवाह नागपुर के बाहर के गांवों या उसके आसपास के इलाकों में हुए हैं. ग्रामीण इलाकों में काटोल तहसील बाल विवाह के मामले में सबसे आगे है. तहसील में आकर बसे समुदायों में बाल विवाह की पुरानी परंपरा आज भी कायम है. इसी समुदाय में सबसे अधिक बाल विवाह रोके गए हैं. वर्ष 2०21-22 में 12, 2०22-23 में 4, 2०23-24 में 8, 2०24-23 11 और 2०25 से 2०26 में 13 बालविवाह रोके गये.


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