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‘मौत वाली पुड़िया’ और वशीकरण का खूनी खेल: प्यार के कांटे को निकालने के लिए रची गई रोंगटे खड़े कर देने वाली साजिश!

चिमूर भिसी :- कहते हैं प्यार अंधा होता है, लेकिन जब यही प्यार सनक बन जाए तो इंसान शैतान बन जाता है। चंद्रपुर जिले के भिसी इलाके में एक ऐसी ही रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। एक २२ साल के नौजवान को ‘वशीकरण’ का ऐसा झांसा दिया गया कि उसने हंसते-खेलते मौत को गले लगा लिया।

अंधविश्वास का वशीकरण जाल

२२ वर्षीय बादल मेश्राम को क्या पता था कि जिस ‘वशीकरण’ की पुड़िया के दम पर वह अपनी दुनिया बसाने के सपने देख रहा था, वही उसकी कब्र खुद जायेगी। मुख्य आरोपी देवानंद श्रीरामे ने बादल को अपने रास्ते का कांटा समझते हुए उसे हटाने की खौफनाक प्लानिंग की। उसने दो पेशेवर अपराधियों, आरिफ खान पठान और सौरभ चौधरी को ‘मालामाल’ करने का लालच देकर बादल की सुपारी दे डाली।

“आंखें बंद करो और पत्थर उठाओ…” – फिर जो हुआ वो खौफनाक था!

साजिश के तहत बादल को मुरपार के घने जंगलों में ले जाया गया। वहां उसे एक टोटका बताया गया— “आंखें बंद करो, अपनी प्रेमिका का नाम लो और जमीन से पांच पत्थर उठाओ, वो तुम्हें मिल जाएगी।” मासूम बादल ने जैसे ही अपनी प्रेमिका का नाम लेकर आंखें मूंदी, देवानंद ने पीछे से नायलॉन की रस्सी उसके गले में डाल दी। बादल तड़पता रहा, रहम की भीख मांगता रहा— “दादा, मुझे क्यों मार रहे हो?” लेकिन पत्थर दिल देवानंद का हाथ नहीं कांपा। उसने गरजते हुए कहा— “तू ही मेरे रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा है” और देखते ही देखते बादल की सांसें हमेशा के लिए थम गईं।

 सबूत मिटाने की ‘मास्टरमाइंड’ कोशिश

हत्या के बाद आरोपियों ने बादल की लाश को जंगल के एक नाले में दफना दिया। पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए उसका मोबाइल और बाइक उमरेड में फेंक दिए, ताकि पुलिस भटकती रहे। आरोपी गांव में ऐसे घूम रहे थे जैसे कुछ हुआ ही न हो।

पुलिस की मुस्तैदी ने उतारा नकाब!

भले ही कातिलों ने शातिराना चाल चली थी, लेकिन कानून के हाथ उनके गिरेबान तक पहुंच ही गए। चंद्रपुर पुलिस अधीक्षक मुम्मका सुदर्शन के मार्गदर्शन में एलसीबी और भिसी पुलिस ने जाल बिछाया। १०० से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल्स (CDR) खंगालने के बाद पुलिस का शक देवानंद पर गहराया। कड़ाई से पूछताछ हुई तो उसने अपना गुनाह उगल दिया। जमीन के भीतर दफन राज बाहर आया और पुलिस ने तीनों दरिंदों को सलाखों के पीछे भेज दिया।

घटना की पृष्ठभूमि:

१७ जनवरी २०२६ को बादल मेश्राम उमरेड से अपनी दुपहिया गाड़ी लाने की बात कहकर घर से निकला था, लेकिन वह वापस नहीं लौटा। १९ जनवरी को उसकी मां गीता मेश्राम ने भिसी पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

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