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देश में नक्सलवाद आखिरी सांसें गिन रहा है – पीएम मोदी  

– आज जो संविधान हाथ में हिलाते हैं; नक्सली हिंसा के चरम पर उनके हाथ कांपते थे

नई दिल्ली :- पीएम मोदी ने देश में दशकों से जारी नक्सलवाद हिंसा को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि जो लोग अब संविधान दिखा रहे हैं, उनके हाथ तब कांप रहे थे, जब नक्सली हिंसा चरम पर थी। रिपब्लिक भारत न्यूज चैनल के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम ने सोमवार को कहा कि पिछली कांग्रेस सरकारों ने नक्सल प्रभावित इलाकों को पिछड़ा क्षेत्र करार दिया था। लेकिन एनडीए सरकार ने उन इलाकों को बदलने की चुनौती स्वीकार की, वहां के लोगों को निराशा से बाहर निकलने में मदद की और उनमें तरक्की की उम्मीदें जगाईं।

पीएम ने आगे कहा कि सरकारें आईं और गईं, पीढ़ियां आईं और गईं और ऐसा लगा कि हिंसा का यह दुर्भाग्य ऐसे ही बना रहेगा। लेकिन हमने स्थिति को बदलने के लिए ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प के साथ कदम आगे बढ़ाए। आज, देश में माओवादी-नक्सलवाद अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है। यह इसलिए संभव हो पाया क्योंकि इसके लिए पूर्ण समर्पण की आवश्यकता थी।

दरअसल कांग्रेस नेता राहुल गांधी को कई बार संविधान की प्रति हाथ में लहाराते देखा गया है। 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद सांसद के तौर पर शपथ लेते समय भी उन्होंने यही किया था।

‘नेशन फर्स्ट’ ही सरकार का मूल मंत्र: पिछले 12 सालों में केंद्र सरकार के हर फैसले और हर प्रयास के केंद्र में ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना रही है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान, मेक इन इंडिया, खादी और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने जैसे कदम इसी सोच का हिस्सा हैं। हाल ही में जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के दौरान दुनिया के नेताओं ने महसूस किया कि आज का भारत ‘नेशन फर्स्ट’ के सिद्धांत पर आगे बढ़ रहा है।

मध्यम वर्ग को टैक्स और स्वास्थ्य में राहत मिली: 2013-14 में 2 लाख रुपए से अधिक आय पर टैक्स लगता था, जबकि अब 12 लाख रुपए सालाना तक की आय को कर से छूट दी गई है।

जीएसटी सुधारों से टैक्स प्रक्रिया आसान हुई है और लोग घर बैठे आयकर रिटर्न भर सकते हैं। वहीं, जन औषधि केंद्रों के जरिए सस्ती दवाएं मिलने से लोगों की करीब 40 हजार करोड़ रुपए की बचत हुई है।मेट्रो, ट्रेन और एयरपोर्ट का तेजी से विस्तार: 2014 में रोजाना करीब 28 लाख लोग मेट्रो से सफर करते थे, जबकि अब यह संख्या 1.28 करोड़ तक पहुंच गई है। वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत जैसी ट्रेनें देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में देश में एयरपोर्ट की संख्या भी दोगुनी हुई है।

नक्सलबाड़ी गांव से शुरू हुआ था नक्सलवाद

भारत में नक्सलवाद (माओवादी आंदोलन) की शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के नक्सलबाड़ी गांव से हुई थी। इसी वजह से इसे नक्सलवाद कहा गया। समय के साथ यह आंदोलन कई राज्यों में फैला और 2000 के दशक में देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में से एक बन गया।

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