– रियायत चाहिए तो 199 रुपये का एनसीएमसी कार्ड अनिवार्य
– महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए बड़ा बदलाव: अब बिना नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड नहीं मिलेगी छूट
गोंदिया :- महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में महिलाओं और 65 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को किराए में आधी रियायत मिलती है, जबकि 75 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों को किराया नहीं लगता। लेकिन अब इन यात्रियों को नेशनल कॉमन मोविलिटी कार्ड (एनसीएमसी) बनाना जरूरी है। जिसके लिए 199 रुपए देने होंगे। कार्ड पुराना अथवा खराब होने पर उसे जमा करने पर 149 रुपए में नया कार्ड मिल जाएगा। यह कार्ड केवल परिचय पत्र नहीं बल्कि एक प्रीपेड वॉलेट होगा। जिसमें कम से कम 100 रुपए बैलेंस रखना अनिवार्य होगा और इसे आवश्यकता के अनुसार रिजार्च किया जा सकेगा। एनसीएमसी कार्ड बनाने के संबंध में शासन का परिपत्रक 12 फरवरी को जारी हुआ है। भविष्य में एसटी यात्रा में हर प्रकार की रियायत पाने वाले लाभार्थियों को यह कार्ड बनाना अनिवार्य होगा। डिपो मैनेजर येतिश कटरे ने कहा फिलहाल इसके लिए सख्ती नहीं की जा रही है। लेकिन यात्रियों से निवेदन है कि वे जल्द से जल्द उपरोक्त कार्ड बनवा लें, ताकि भविष्य में उन्हे यात्रा के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े।
महाराष्ट्र में एसटी बसों से यात्रा करने वाली महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक अहम बदलाव लागू किया गया है। महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) ने स्पष्ट किया है कि किराए में मिलने वाली रियायत का लाभ अब केवल नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड के माध्यम से ही मिलेगा। यह कार्ड बनवाने के लिए यात्रियों को 199 रुपये शुल्क अदा करना होगा। राज्य की सभी महिलाओं को एसटी बस किराए में 50 प्रतिशत छूट 65 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को आधा किराया 75 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों को निःशुल्क यात्रा अब तक यह रियायत पहचान पत्र दिखाकर मिल जाती थी, लेकिन नई व्यवस्था के तहत NCMC कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड एक स्मार्ट कार्ड है, जिसके जरिए बस, मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में कैशलेस भुगतान किया जा सकता है। एमएसआरटीसी के अनुसार, इस कार्ड से यात्रियों की पहचान और रियायत की पात्रता की डिजिटल पुष्टि होगी, जिससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी। निगम अधिकारियों के मुताबिक 199 रुपये में कार्ड निर्माण, पंजीकरण और तकनीकी प्रक्रिया की लागत शामिल है। कार्ड एक बार बनवाने के बाद लंबे समय तक उपयोग में लाया जा सकेगा।
अब स्मार्ट कार्ड से होगी पुष्टि
हालांकि, इस फैसले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ यात्रियों का कहना है कि रियायत पाने के लिए अतिरिक्त शुल्क लेना उचित नहीं है, खासकर तब जब योजना का उद्देश्य महिलाओं और बुजुर्गों को राहत देना है।
गोंदिया डिपो से मिली जानकारी के अनुसार, कार्ड बनाने की प्रक्रिया जल्द ही सभी डिपो और अधिकृत केंद्रों पर शुरू की जाएगी। यात्रियों को आधार कार्ड, आयु प्रमाण पत्र और फोटो सहित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। एमएसआरटीसी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने और यात्रा प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में उठाया गया है। भविष्य में इसी कार्ड के माध्यम से अन्य सेवाएं भी जोड़ी जा सकती हैं।