– जितेंद्र सिंह पेश करेंगे, एनडीए का पक्ष रखेंगे 9 सांसद, 2024 का कानून बदलेगा
नई दिल्ली :- संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को केंद्र सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनुचित साधनों पर लगाम कसने के उद्देश्य से ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ लोकसभा में पेश करेगी। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह सदन में यह विधेयक प्रस्तुत करेंगे।
सरकार का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों को देखते हुए मौजूदा कानून को और अधिक प्रभावी एवं कठोर बनाया जा रहा है। प्रस्तावित संशोधन के तहत आरोपियों के लिए सजा और आर्थिक दंड बढ़ाने के साथ-साथ मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन का भी प्रावधान किया गया है। लोकसभा में इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर से विभिन्न सहयोगी दलों के सांसद सरकार का पक्ष रखेंगे। इनमें भाजपा, तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी), शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), अपना दल, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) तथा जनता दल (यूनाइटेड) के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे।

विपक्ष उठाएगा ‘नीट’ और छात्रों पर कार्रवाई का मुद्दा
मानसून सत्र में विपक्ष भी पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक तथा विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा सदन में जोरदार तरीके से उठाएंगे। विपक्ष सरकार से इस पूरे मामले में जवाबदेही तय करने और पारदर्शी जांच की मांग कर रहा है।
2024 के कानून में होंगे महत्वपूर्ण बदलाव
सरकार द्वारा लाया जा रहा यह संशोधन विधेयक वर्ष 2024 में लागू किए गए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम में बदलाव करेगा। प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार:-
• पेपर लीक और परीक्षा में धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में अधिक कठोर सजा का प्रावधान किया जाएगा।
• दोषियों पर पहले से अधिक भारी जुर्माना लगाया जा सकेगा।
• राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित कर सकेंगे।
• इन अदालतों में मामलों की दैनिक आधार पर सुनवाई होगी, जिससे शीघ्र फैसला सुनिश्चित किया जा सके।
सरकार का मानना है कि इन प्रावधानों से पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बढ़ेगी।
प्रधानमंत्री ने किया था सख्त कार्रवाई का ऐलान:
इस विधेयक को लाने की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई की रात जारी अपने वीडियो संदेश में की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि पेपर लीक कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने आश्वासन दिया था कि दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सरकार कानून को और मजबूत बनाएगी।
विपक्ष की प्रतिक्रिया: प्रधानमंत्री संसद में दें जवाब
पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्ष ने भी सरकार पर निशाना साधा है।कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि पार्टी इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा करेगी और उसके बाद अपना रुख तय करेगी।समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों के भविष्य का सवाल है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकना सरकार की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी है।वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि जब संसद का सत्र चल रहा हो तो प्रधानमंत्री को सदन में आकर बयान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद के बाहर वीडियो संदेश जारी करना उचित संसदीय परंपरा नहीं है।
विधेयक पर सरकार का पक्ष रखेंगे ये सांसद:
लोकसभा में संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान एनडीए की ओर से कई प्रमुख सांसद भाग लेंगे। इनमें भाजपा की बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या, टीडीपी के लावु श्रीकृष्ण देवरायलु, शिवसेना के डॉ. श्रीकांत शिंदे, एनसीपी के सुनील तटकरे, अपना दल की अनुप्रिया पटेल, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अरुण भारती तथा जदयू के आलोक कुमार सुमन प्रमुख रूप से सरकार का पक्ष रखेंगे।
सरकार को उम्मीद है कि इस संशोधन विधेयक के पारित होने के बाद देशभर में होने वाली सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता मजबूत होगी तथा पेपर लीक जैसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।





