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“पवार की चाल, ठाकरे बंधु बेहाल – कांग्रेस की बढ़ी टेंशन

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– क्या ठाकरे बंधुओं को मिलेगा साथ?’

– ठाकरे-मिलन’ पर पवार का गुगली गेम – कांग्रेस को आया पसीना!”

मुंबई :- उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की संभावित युती की चर्चा जोरों पर है। बताया जा रहा है कि उद्धव ने महाविकास आघाड़ी में राज के लिए सिफारिश भी की है। लेकिन शरद पवार ने साफ कहा – हर जगह साथ नहीं, कुछ जगह अलग भी लड़ेंगे! मुंबई-ठाणे में ठाकरे बंधुओं की ताकत का पवारों ने परोक्ष समर्थन किया, और ज़्यादा सीटों की माँग को जायज़ बताया। अब सवाल है – पवार अपनी चाल चल रहे हैं या ठाकरे बंधुओं को वाकई समर्थन दे रहे हैं? कांग्रेस इस ‘गुगली’ से चिंतित है।

मेट्रो परीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को ‘विधायक’ कह दिया। मंच पर ही सरनाईक ने चुपचाप सीएम के कान में कहा – “साहेब, मैं अब मंत्री हूँ!”

इसके बाद तुरंत फडणवीस ने अपनी बात सुधारी और सभी के चेहरे पर हल्की मुस्कान फैल गई। यह नजारा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। नवी मुंबई पुलिस ने एक ड्रग्स गिरोह पर ‘मोक्का’ के तहत कार्रवाई करते हुए 50 लाख के मादक पदार्थ जब्त किए। कोपरखैरणे पुलिस की इस सफलता ने आयुक्त मिलिंद भारंबे की ‘ड्रग्स फ्री नवी मुंबई’ मुहिम को नई ताकत दी है। पिछले दो वर्षों में भारंबे के नेतृत्व में कई नामी गिरामी ड्रग्स माफिया सलाखों के पीछे जा चुके हैं। मुंबई में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बाँस सम्मेलन के समापन पर तकनीकी गड़बड़ी से ‘महाराष्ट्र गीत’ नहीं बजा। मौके की नज़ाकत समझते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपनी जेब से मोबाइल निकाला, गीत प्ले किया और माइक के पास रख दिया। गीत खत्म होने पर पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। लोगों ने सीएम की समयसूचकता और सूझबूझ की सराहना की।

“क्या ठाकरे बंधुओं को मिलेगा पवार का साथ?

महाराष्ट्र की राजनीति में फिर से हलचल तेज है – वजह है ठाकरे बंधुओं की संभावित युति। उद्धव और राज के बीच बातचीत हुई तो पवार साहब ने भी चुप्पी साधी नहीं, बल्कि एक गुगली फेंक दी।

बोले – “हर जगह युति जरूरी नहीं, कुछ जगह अलग भी लड़ा जाएगा। लेकिन अगली ही सांस में कहा – “ठाकरे बंधुओं की ताकद मुंबई-ठाणे में कम नहीं! ये बयान था या संकेत? कांग्रेस के नेताओं की भौंहें तनीं और माथे पर चिंता की लकीरें आ गईं। उद्धव ने भी कहा, “राज हमारे साथ आएं तो हमें कोई एतराज नहीं। क्या ये एमवीए में नया चेहरा जुड़ने की तैयारी है या सिर्फ राजनीतिक शतरंज की बिसात? पवार ने न खुलकर समर्थन दिया, न पूरी तरह इनकार किया – यहीं तो है असली ‘पवार नीति’! ठाकरे बंधु साथ आए तो मुंबई-ठाणे की सीटों पर बड़ा उलटफेर मुमकिन। कांग्रेस को डर है कि कहीं एमवीए में उनकी हिस्सेदारी और कमजोर न हो जाए। अब देखना ये है कि ये ‘ठाकरे-मिलन’ हकीकत बनता है या सिर्फ एक चुनावी अफवाह रह जाएगा। पर एक बात तय है – पवार की हर चाल में अगला मास्टरस्ट्रोक छुपा होता है.