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पीएम मोदी का ‘टुकड़े-टुकड़े’ वाला कटाक्ष और कांग्रेस का पलटवार

– आखिर वंदे मातरम् पर क्यों छिड़ा है ‘धर्मयुद्ध’?

नई दिल्ली :- राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 साल पूरे हो गए हैं. इस मौके पर पीएम मोदी ने कांग्रेस पर टुकड़े-टुकड़े वाला जो कटाक्ष किया, उस पर सियासी बवाल शुरू है. वंदे मातर पर धर्मयुद्ध बढ़ता जा रहा है. अब नए-नए राज्यों के नाम इसमें जुड़ते जा रहे हैं. नया एपिसोड कश्मीर से रिलीज हुआ है. इसमें हिंदू मुस्लिम वाली चिंगारियां हैं. उधर, पीएम मोदी के कटाक्ष के बाद कांग्रेस ने पलटवार भी किया है.

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने एक पोस्ट में लिखा, कांग्रेस पार्टी के किसी भी आयोजन में वंदे मातरम् और जन गण मन दोनों गाये जाते हैं. आज बड़ी बातें करने वाले आरएसएस और बीजेपी ने अपनी शाखाओं या कार्यालयों में कभी वंदे मातरम् या हमारा राष्ट्रगान जन गण मन नहीं गाया. इसके बजाय, वे “नमस्ते सदा वत्सले” गाते रहते हैं, जो राष्ट्र का नहीं, बल्कि उनके संगठनों का महिमामंडन करने वाला गीत है. 1925 में अपनी स्थापना के बाद से RSS ने वंदे मातरम् से परहेज किया है.

मुस्लिम नेताओं के अनुसार, वंदे मातरम् गीत गैर इस्लामी है. राष्ट्रगीत पूरी तरह इस्लाम की मान्यतों के खिलाफ है क्योंकि वंदे मातरम् में भारत माता को नमन किया जाता है. भारत माता का नाम लेकर देवी के स्वरूप की पूजा की जाती है. ऐसा करना इस्लाम धर्म के मुताबिक बुतपरस्ती है. मुसलमान सिर्फ अल्लाह के सामने ही अपना सिर झुकाते हैं और वो सिर्फ उन्हीं की इबादत कर सकते हैं किसी और की नहीं. इन्हीं तर्कों के साथ वंदे मातरम पर कश्मीर का पारा भी चढ़ा है. आज प्रधानमंत्री मोदी ने वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया. साथ ही कांग्रेस पर कटाक्ष किए. उन्होंने बताया कि कैसे वंदे मातरम् गीत के टुकड़े-टुकड़े किए गए. वंदे मातरम् गीत बंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा था. 1875 में इसे बंग दर्शन पत्रिका में प्रकाशित किया गया. 1905 में बंगाल विभाजन के दौरान वंदे मातरम् का गीत लोगों की ज़ुबान पर चढ़ गया जो अंग्रेजों के दिल में डर पैदा कर रहा था. तभी कुछ मुस्लिम नेताओं ने इसके विरोध में अपने सुर छेड़े.

पंडित नेहरू की अगुआई में बनी थी समिति

1937 में वंदे-मातरम पर हिंदू मुस्लिम टकराव रोकने के लिए पंडित नेहरू की अगुआई में एक समिति बनाई गई, जिसमें मौलाना अबुल कलाम आज़ाद भी थे. तब अबुल कलाम आज़ाद ने इस गीत को पढ़ा और बताया- इसके शुरुआती 2 पद इस्लाम विरोधी नहीं हैं क्योंकि उनमें मातृभूमि की बात है लेकिन 2 पदों के बाद हिंदू देवी देवताओं का ज़िक्र है.

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