– हर दिन करोड़ों का राजस्व चोरी
नागपुर :- एक दिन पहले नागपुर ग्रामीण पुलिस की क्राइम ब्रांच ने रेत तस्करी के मामले में गलती से नागपुर ही नहीं, पूरे विदर्भ के मास्टरमाइंड को पकड़ लिया. आरोपी का नाम खरबी निवासी मोहम्मद इनाजुल उर्फ कल्लू खान (38) बताया गया जिसे फर्जी परमिट के जरिए रेत की तस्करी करते हुए गिरफ्तार किया गया. इस दौरान पुलिस ने रेत, टिप्पर और चौपहिया वाहन समेत कुल 61,45,000 रुपये का माल जब्त किया. कल्लू के साथ टिप्पर चालक गरीब नवाज चौक, खरबी निवासी कैसल अली रियाजुद्दीन अली (47) को भी अरेस्ट किया गया. कल्लू की पहुंच इतनी है कि उसकी गिरफ्तारी की खबर फैलते ही उसे बचाने के लिए सत्तारूढ़ नेताओं के फोन आने लगे.
क्या है मामला…: क्राइम ब्रांच ने मौजा भिवापुर अंतर्गत कारगांव रेलवे परिसर में नाकाबंदी करके टिप्पर (एमएच 49/बीजेड-1717) और उसे एस्कॉट कर रही कार (एमएच-49/सीडी-4577) को रोका. टिप्पर की तलाशी में रेत बरामद हुई जो फर्जी परमिट पर परिवहन की जा रही थी. पुलिस ने मौके से चालक कैसर और कार में
सवार कल्लू को अरेस्ट कर लिया.
सूत्रों के अनुसार, कल्लू की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही जहां अन्य रेत ठेकेदारों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी तो वहीं कुछ नेताओं में हड़कम्प मच गया. कहा जा रहा है कि कल्लू ही नागपुर समेत पूरे विदर्भ यानी भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गड़चिरोली, बुलढाना समेत अन्य जिलों में रेत तस्करी का असली मास्टरमाइंड है. वह हर दिन एक बार रायल्टी कटवाकर 10 बार ट्रकों से रेत ढोता है. इससे हर दिन सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा है. पकड़े जाने की स्थिति से बचने के लिए वह ट्रक चालकों को फर्जी रायल्टी रसीद बनाकर भी देता था.
इस बीच प्रशासन का लूप होल सामने आया. जिला प्रशासन ने रेत तस्करी रोकने के लिए ट्रकों और टिप्परों में जीपीएस सिस्टम अनिवार्य करने के साथ ही एक मोबाइल एप शुरू किया है. कहा गया था कि इस एप में रेती घाट पर किसी भी ट्रक या टिप्पर की संदिग्ध मूवमेंट का अलर्ट तुरंत मिल जायेगा जिससे अधिकारियों को तस्करी रोकने में मदद मिलेगी. हालांकि नाम न बताने की शर्त पर रेत परिवहन से जुड़े कुछ लोगों ने बताया कि एप पर अलर्ट आने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जाती क्योंकि ये अलर्ट कल्लू से जुड़े ट्रकों के होते हैं. अंदरखाने यह भी कहा जा रहा है कि यह एप भी एक छलावा है क्योंकि इसे सभी फीचर्स के साथ लांच ही नहीं किया गया है.
बताया गया कि कल्लू के सिर पर एक बड़े अल्पसंख्यक नेता का हाथ है. कल्लू को बचाने के लिए सत्ताधारी दल के नेताओं के फोन आने लगे. हालांकि इस समय तक काफी कानूनी लिखा-पढ़ी हो चुकी थी. एक और पुलिस कानूनी कार्यवाही कार्यवाही में लगी है तो दूसरी ओर राजस्व विभाग के अधिकारियों ने अभी तक कलम भी चलाना शुरू नहीं किया है. एक्शन तो बहुत दूर की बात है. समझा जा सकता है कि कल्लू के पकड़े जाने से किस-किस को दर्द हुआ.
सूत्रों ने बताया कि कल्लू मूलतः झारखंड का रहने वाला है लेकिन अपने काम को खुफिया तरीके से अंजाम देने में माहिर होने के कारण कुछ ही समय में नागपुर और विदर्भ में रेत तस्करी में बड़े लोगों का चहेता बना गया.
कल्लू का नेटवर्क इतना मजबूत बताया जाता है कि वह कलेक्टर, तहसीलदार से लेकर पुलिस और राजस्व समेत अन्य विभागों के अधिकारियों के मूवमेंट की पूरी जानकारी रखता है.
वह सभी संबंधित अधिकारियों की रेकी करता था. प्रशासनिक विभाग के अलावा राजस्व और पुलिस विभाग के कार्यालयीन वॉट्सएप ग्रुप तक उसकी पहुंच है. इसलिए उसे अधिकारियों की हर हरकत का पता कुछ ही सेकंड में चल जाता है.

