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सार्वजनिक बांधकाम विभाग नागभीड़ में उपस्थिति और टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल! जिम्मेदारों की चुप्पी से चर्चाओं को मिला बल

चंद्रपुर :- नागभीड़ में स्थित सार्वजनिक बांधकाम विभाग इन दिनों गंभीर चर्चाओं के घेरे में है। विभाग की कार्यकारी अभियंता की कार्यालयीन उपस्थिति, कर्मचारियों की नियमितता और टेंडर प्रक्रिया को लेकर स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों और कार्यालय से जुड़े लोगों में चर्चा है कि कार्यकारी अभियंता सप्ताह में सीमित दिनों में ही कार्यालय आती हैं। आरोप यह भी है कि जिस दिन वे कार्यालय में उपस्थित नहीं रहतीं, उस दिन कुछ कर्मचारी भी कार्यालय से नदारद रहते हैं। यदि ऐसा है, तो यह केवल उपस्थिति का मामला नहीं, बल्कि आम नागरिकों के कामकाज, विभागीय अनुशासन और सरकारी व्यवस्था की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है।

जब हमारी टीम इन चर्चाओं की पुष्टि करने सार्वजनिक बांधकाम विभाग नागभीड़ कार्यालय पहुंची, तब कार्यकारी अभियंता कार्यालय में उपस्थित नहीं थीं। टीम ने कार्यालय में मौजूद कई लोगों से उनका संपर्क नंबर मांगा, लेकिन किसी ने नंबर उपलब्ध नहीं कराया और एक-दूसरे पर बात टालते रहे। अंत में एक कर्मचारी ने अन्य अधिकारी का नंबर दिया। उस अधिकारी से संपर्क करने के बाद कार्यकारी अभियंता का नंबर प्राप्त हुआ। कार्यकारी अभियंता से फोन पर संपर्क करने पर उन्होंने केवल इतना बताया कि वे मीटिंग में व्यस्त हैं।

अब सवाल यह उठता है कि यदि अधिकारी मीटिंग में थीं, तो कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों ने सीधे उनका संपर्क नंबर देने से परहेज क्यों किया? क्या विभाग में आम नागरिकों और मीडिया से संवाद को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है? या फिर कार्यालयीन कार्यप्रणाली को लेकर भीतर ही भीतर कोई असहजता है?

इसी बीच टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के अनुसार विभाग में कई कार्य “ॲट पार” या नाममात्र “बिलो” दरों पर स्वीकृत किए जा रहे हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों में ठेकेदार कई प्रतिशत बिलो में कार्य लेने को तैयार रहते हैं। चर्चा है कि कुछ बड़े टेंडरों में प्रतिस्पर्धा अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि यदि लगातार कम प्रतिस्पर्धा वाले टेंडर स्वीकृत हो रहे हैं, तो इसकी तकनीकी, प्रशासनिक और वित्तीय स्तर पर जांच होनी चाहिए। क्योंकि सरकारी धन से होने वाले कार्यों में प्रतिस्पर्धा, पारदर्शिता और गुणवत्ता तीनों ही महत्वपूर्ण हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति अनिवार्य होनी चाहिए, ताकि आम लोगों के काम समय पर हो सकें। वहीं विभागीय सूत्रों का कहना है कि कई बार अधिकारी फील्ड विजिट, बैठक और प्रशासनिक कार्यों के कारण कार्यालय से बाहर रहते हैं। लेकिन यदि यही स्थिति बार-बार बन रही है, तो विभाग को अपनी उपस्थिति और कार्यप्रणाली का स्पष्ट रिकॉर्ड सार्वजनिक करना चाहिए।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या नागभीड़ सार्वजनिक बांधकाम विभाग में सब कुछ नियमों के अनुसार चल रहा है? क्या टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है? क्या अधिकारी और कर्मचारी नियमित रूप से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं? या फिर यह मामला केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं, बल्कि जांच योग्य विषय है?

इन सवालों के जवाब केवल आधिकारिक रिकॉर्ड, उपस्थिति रजिस्टर, टेंडर दस्तावेज और उच्च स्तरीय जांच से ही स्पष्ट हो पाएंगे। फिलहाल नागभीड़ में सार्वजनिक बांधकाम विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और अब लोगों की नजर विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी है।


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