नागपूर :- राष्ट्र वर्धन के लिए अहंकार को छोड़ने की प्रेरणा हमें भगवान श्री कृष्ण की नीति प्रदान करती है। सत्ता पाकर भी अनासक्ति का संदेश श्रीकृष्ण के जीवन से मिलता है। यह विचार प्रसिद्ध वक्ता एवं संस्कार भारती के अ भा महामंत्री आशुतोष अडोणी ने सन्मित्र सभा के स्थापना दिवस समारोह में प्रमुख वक्ता के रूप में बोलते हुए व्यक्त किये। ‘ कृष्ण नीति- वर्तमान संदर्भ में’ विषय पर उनका व्याख्यान आयोजित था।
भगवान श्रीकृष्ण के जीवन की लीलाओं का पौराणिक उद्धरणों के साथ विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण के जीवन संकटों से घिरा था। इसलिए उनकी हर लीला एक संदेश है। गोवर्धन पूजा परंपराओं के समयानुसार परिवर्तन की आवश्यकता बताती है तो जरासंध वध नारी मुक्ति और नारी सशक्तिकरण की राह बताती है। लोकहित में मथुरा से द्वारका पलायन कर रणछोड़ बनने में भी उन्होंने झिझक नहीं दिखाई। छत्रपति शिवाजी के संघर्ष में जहाँ श्रीकृष्ण की कूटनीति की झलक दिखती है तो राष्ट्र के लिए संघर्ष में वीर सावरकर में श्रीकृष्ण की अडिगता दिखती है। वर्तमान में धारा ३७० को खत्म करने के लिए अपनाई नीति अथवा बालाकोट कार्रवाई और आपरेशन सिंदूर में कृष्ण नीति की झलक दिखती है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को रिसोर्स मैनेजमेंट के नजरिये से देखने की जरूरत है उनकी नीति में समाज के अभ्युदय का विचार है । डॉ हेडगेवार रक्तपेढी़ के अनंराव भिड़े सभागार में संपन्न इस कार्यक्रम का आरंभ प्रमुख अतिथि आशुतोष अडोणी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया उज्वला अंधारे ने सन्मित्र प्रार्थना का वाचन किया सन्मित्र सभा के अध्यक्ष अनिल शेंडे ने प्रमुख अतिथि का सन्मित्र सभा की ओर से सत्कार किया। शेंडे ने अपनी प्रस्तवना रखते हुए सभा के विभिन्न उपक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने सभा के सदस्यों तथा समाज के प्रबुद्ध जनों से सहयोग की अपील की इस अवसर पर उन्होंने ग्यारह हज़ार रुपये के अनुदान की घोषणा की।
इस वार्षिक समारोह में विवाह के ५० वर्ष पूर्ण करने वाले युगल डा सदाशिव तथा अश्विनी जोशी एवं उम्र के ६० तथा ७५ वर्ष पूर्ण करने वाले सदस्यों शालिनी गोरले विनोद जोशी चंदू भगत राम माताडे अरुण केदार जयश्री प्रभु देशपांडे, शुभारंभ परांजपे का सत्कार किया गया इस समारोह में विशेष रूप से उपस्थित वयोवृद्ध समाजसेवी, आशुतोष अडोणी के पिता वसंतराव अडोणी का अध्यक्ष अनिल शेंडे ने सत्कार किया। प्रमुख अतिथि का परिचय कार्यकारिणी सद्स्य अरुण केदार ने कराया कार्यक्रम का संचालन सभा की सचिव वृषाली शिलेदार ने किया डा उज्वला अंधारे के वंदेमातरम गायन से कार्यक्रम का समापन हुआ।





