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स्मार्ट सिटी या भूमाफियाओं का खेल? पूर्व नागपुर में गरीबों की जमीन पर बड़ा सवाल

– श्मशान घाट की जमीन पर कब्जे का आरोप, जनता में भारी आक्रोश

– सड़क पर बाजार, ट्रैफिक जाम और हादसे: क्या यही है स्मार्ट सिटी का विकास?

नागपुर :- पूर्व नागपुर में स्मार्ट सिटी के नाम पर लोगों को सपने दिखाकर भूमाफिया के हवाले सैकड़ों एकड़ जमीन कर दी गई गरीबों के मालिकले मनको करजाया गया, स्मार्ट सिटी की में परिसर के नागतिक हैरान परेशान हो गए है. लेकिन यहां के अरतिनिधि सुती मा रहे है भूमाफिया और रईसों को लान पहुंचाने वालों को जनता को सडक सिमाना दिए परिसर की जनता गरीब है, जिसकी वजह से उन्होंने सिटी सर्वे में संपत्ति पर अपना नाम दर्ज नहीं कराया है. इससे उनके मालिकी पर भी स्मार्ट सिटी प्रशासन की तरफा में सवाल साहे किया जा रहे हैं. ऐसे संपतिधारक 60 फीसदी से अधिक है.

पूर्व नागपुर के पारडी पूरापुर, भरतवाड़ा और भांडेवाडी क्षेत्र में स्मार्ट सिटी का खूब प्रचार किया गया लेकिन वास्तविकता में इस परियोजना के नाम पर गरीबी का जीवन कठिन बनाकन धनों की भरी जा रही है. ऐसा थौकाने वाला मामला सामने आया है. आम नागरिकों के अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं के लिए आरक्षित जमीन पर कब्जा कर उसे बड़े लोगों के हित में सौंपने की साजिश स्मार्ट सिटी प्रशासन द्वारा स्वी गई है. इस पूरे कथित घोटाले के पीछे पूर्व नागपुर के एक बड़े जनप्रतिनिधि का संरक्षण होने की चर्चा है और नागरिक इस पूरे मामले की जांच की भांग कर रहे हैं. हालत यह है कि परिसर को स्मार्ट सिटी का दर्जा दिया जाता है, लेकिन यहां सड़कों पर ही साप्ताहिक बाजार लग रहे है. यह पाली क्षेत्र के स्मशानघाट की स्थिति बेहद आराब है यहा अतिम संस्कार के लिए आने वाले मृतकों के परिजनों को भारी पोशानियों का सामना करना पड़ता है. यदि एक साथ 2 से 3 राय आए तो अंतिम संस्कार के लिए इतर करना पड़‌ता है. परिजनों के बैठने तक की उचित व्यवस्था नहीं है बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए पारडी स्मशान घाट और अन्य सुविधाओं के लिए 36 एकड़ जमीन आरक्षित की गई थी इसमें से 17.50 एकड़ अमीन श्मशान घाट के लिए तथा बाकी जमीन स्थानीय साप्ताहिक बाजार और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए निर्धारित थी घाट की 15.50 एकड़ जमीन भूमाफिया को बाट दी गई. स्मार्ट सिटी के नाम पर सभी नियमों को ताक पर रखकर यह आरक्षण अचानक समाप्त कर दिया गया और अमीन कौ नियमित कर दिया गया जरता के अधिकारों की जमीन पर नजर रखने वाले ये धनकुबेर कौन है और उन्हें संरक्षण कौन दे रहा है, यह सवाल अब लोग गुस्से में पूछ रहे हैं.

पेश परिसर में बेहद विरोधाभासी और शर्मनाक तस्वीर करता है. नियमों का उल्लंघन कर स्मशान घाट की जमीन हड़पने वाली और इसके पीछे के राजनीतिक सूत्रधारों की उध्यस्तरीय जांच होनी ही चाहिए, पूर्व नागपुर की जनता अथ इस अन्याय के खिलाफ सड़क पर उठने की तैयारी में है यदि प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो बड़े आंदोलन की आशंका जताई जा रही है.

एक और शहर को स्मार्ट बनाने की चाते की जाती है और दूसरी और नागरिकों को आर ओखिम में डालकर सड़क पर व्यापार करने के लिए मजदूर किया जाता है. बाजार की दता से अक्सर दुर्घटनाएं होती हई कई लोगों को जान तक गवानी पड़ी. ऐसे में सवाल बड़ा होता है कि क्या यही विकास है? पारडी चौक और मुख्य सड़‌कों पर वर्षों से साप्ताहिक बाजार लगता आ रहा है. बाजार के लिए अलग से खुली जगह न होने के कारण व्यापारी और नागरिकों को भी यातायात वाली सड़क पर ही दुकानें लगानी पड़ती है. इससे यहां कई बार गंभीर दुर्घटनाएं हो चुकी है और रोजाना ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है.

हजारों परिवारों पर उजड़ने का खतरा

इस स्मार्ट सिटी परियोजना का सबसे बड़ा नुकसान पूर्व नागपुर के गरीब और मध्यमवगीय प्लॉटधारकों को हुआ है. कई वर्षों पहले लोगों ने गरीबी में पैसे जोड़कर गुंठेवाड़ी योजना के तहत यहां छोटे-छोटे प्लॉट खरीदे थे आज यहां बड़ी आबादी बस चुकी है. लेकिन सूत्रों के अनुसार, इस क्षेत्र के लगभग 60 प्रतिशत संपति धारकों के नाम मिट्टी सबै (अभिलेख पत्रिका) में दर्ज ही नहीं है. नाम दर्ज न होने के कारण इन नागरिकों को उनका वैधानिक मुआवजा भी नहीं मिला है. अब हजारों लोग इस डर में जी रहे हैं कि कहीं उनके घर उजड़ न आएं. स्मार्ट सिटी ने सिटी सर्वे में नाम नहीं दर्ज होने से कई संपत्ति धारकों को खूब परेशान भी किया, जबकि स्थानीय जनप्रतिनिधि उनका दर्द आनने तक नहीं आए.


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