– सरावगी, पेंढ़ारी, कोटेचा,जैन व हनवंते सम्मानित
– क्षमावाणी समारोह में जैन संतों ने बताया क्षमा का महत्व
नागपुर :- महावीर यूथ क्लब नागपुर द्वारा रविवार को क्षमावाणी समारोह में रजवाड़ा पैलेस गांधीसागर हुआ।
प्रतीक राजेश सरावगी को महावीर युवा गौरव पुरस्कार दिया गया। मुनिश्री प्रशमसागर गुरुदेव, मुनिश्री सुप्रभसागर गुरुदेव, मुनिश्री प्रणतसागर गुरुदेव ससंघ के सानिध्य में आयोजन किया गया।
समारोह की अध्यक्षता करियर समुपदेशक डॉ. नरेंद्र भुसारी ने की। मुख्य अतिथि अमरस्वरूप परिवार के प्रमुख मनीष मेहता थे। प्रमुख अतिथि नितिन महाजन, राजेश सरावगी, जगदीश गिल्लरकर, सुरेश अवथनकर, चंद्रकांत वेखंडे, राकेश पाटनी, महावीर यूथ क्लब के अध्यक्ष नितिन नखाते, सचिव प्रशांत मानेकर, वूमेन्स क्लब की अध्यक्षा वैशाली नखाते उपस्थित थे।
अतिथियों के हस्ते दीप प्रज्ज्वलन हुआ। मंगलाचरण वूमेन्स क्लब की सदस्याओं, डॉ. अंजुषा पांडवकर ने किया। मंदिरों और सामाजिक संस्थाओं के अध्यक्षों का सम्मान किया गया। समारोह का संचालन महेश तिवारी ने किया। प्रस्तावना अध्यक्ष नितिन नखाते ने रखी। आभार प्रदर्शन सचिव प्रशांत मानेकर ने किया।
प्रतीक राजेश सरावगी को महावीर युवा गौरव पुरस्कार 2025, राष्ट्रीय स्तर पर सेवा सम्मान पुरस्कार संतोष जैन पेंढारी, राज्यस्तरीय पुरस्कार अनिल जैन वीएसआर, जिलास्तरीय पुरस्कार अतुल कोटेचा, अरविंद हनवंते को अतिथियों के हस्ते शाल, श्रीफल, मानपत्र, मोमेंटो, धर्म दुपट्टा, उनकी धर्मपत्नी का सम्मान किया गया। मानपत्र का वाचन मनुकांत गडेकर, सरिता सावलकर, प्रदीप तुपकर, दिनेश सावलकर, विशाल मानेकर ने किया।
जैन मुनियों का उदबोधन
क्षमा वाणी व्यक्त होती हैं – मुनिश्री प्रशमसागर
मुनिश्री प्रशमसागर गुरुदेव ने संक्षिप्त संबोधन में कहां आप अपने दोषों को नहीं निकालेंगे तो क्या दूसरों के दोषों को निकालेंगे। क्षमा वाणी द्वारा व्यक्त होती हैं, अंतरंग द्वारा होती हैं। झाडू लगाया कितने जीव मर गए क्या उनसे अपने क्षमा मांगी, किससे शिकायत की। अपने वस्त्रों को चमकाने कितने जीवों को त्रिलोक पहुंचाया किससे क्षमा मांगी। अपने आत्मा की शिकायत की, उसे कहां पहुंचाया, उसे कषायों से भर दिया हैं।
क्षमा मंच से नहीं मन से होती हैं – मुनिश्री सुप्रभसागर
मुनिश्री सुप्रभसागर गुरुदेव ने अपने उदबोधन में कहा आज प्रत्येक इन्सान की जिंदगी शिकायत की भांति हैं। आज के इन्सान की जिंदगी शिकायत दर्ज करने में हैं। हम अपने आप से भी शिकायत करते हैं। हमें कम ज्यादा क्या कहना हैं यह आम जन की शिकायत हैं। मंच पर आकर शिकायत वहीं करते हैं, अंतरंग के भावों के साथ क्षमावाणी प्राप्त करना हैं। क्षमा मांगने का व्यवसायीकरण हो गया हैं। क्षमा मंच से नहीं, मन से होती हैं।




