– इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की कठिन परिस्थितियों में परीक्षण सफल
– 25 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य भेदने में सक्षम
नागपुर :- नागपुर स्थित सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (एसडीएएल) ने शुक्रवार को भारतीय सेना को अपना नागास्त्र-2 लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम सौंप दिया। कंपनी के अनुसार, इस प्रणाली ने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उपयोगकर्ता परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। यह प्रणाली आधुनिक युद्धक्षेत्र में दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक व्यवधानों के बीच भी लक्ष्य पर सटीक हमला करने के उद्देश्य से विकसित की गई है।
कंपनी के मुताबिक, सेना को सौंपे गए नागास्त्र-2 सिस्टम में इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ईसीसीएम) की उन्नत क्षमताएं शामिल हैं। इसमें एंटी-जैमिंग, एंटी-स्पूफिंग और मल्टी-मोड संचार जैसी सुविधाएं हैं। इन तकनीकों का उद्देश्य दुश्मन की ओर से संचार या नेविगेशन प्रणालियों को बाधित करने की कोशिशों के बावजूद सिस्टम की कार्यक्षमता बनाए रखना है।
जीपीएस के बिना भी लक्ष्य पर हमला करने की क्षमता
नागास्त्र-2 में विजन-आधारित ट्रैकिंग और स्वायत्त मार्गदर्शन प्रणाली दी गई है। कंपनी के अनुसार, इसकी मदद से यह स्थिर और गतिशील, दोनों प्रकार के लक्ष्यों को निशाना बना सकता है। जीपीएस सिग्नल उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में भी इसकी लक्ष्य पहचान और मार्गदर्शन संबंधी क्षमताएं उपयोगी साबित हो सकती हैं।
इस प्रणाली में ऑपरेटर लक्ष्य को लॉक कर सकता है, जिसके बाद सीमित मानवीय हस्तक्षेप के साथ सटीक हमला किया जा सकता है। इसकी परिचालन क्षमता इसे आधुनिक युद्धक्षेत्र में विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों के विरुद्ध उपयोग के लिए उपयुक्त बनाती है।
बख्तरबंद वाहनों को निशाना बनाने में सक्षम
कंपनी के अनुसार, नागास्त्र-2 में स्वदेशी तकनीक से विकसित टैंडम एंटी-टैंक वारहेड लगाया गया है। इसे विस्फोटक प्रतिक्रियाशील कवच (ईआरए) से लैस बख्तरबंद वाहनों को भेदने के लिए तैयार किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह वारहेड 650 मिलीमीटर तक के रोल्ड होमोजीनियस आर्मर (आरएचए) को भेदने में सक्षम है।
इस प्रणाली की परिचालन सीमा 25 किलोमीटर से अधिक बताई गई है। इसमें दोहरे सेंसर वाला इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल पेलोड भी है, जो दिन और रात दोनों समय काम कर सकता है। इससे लक्ष्य की पहचान, निगरानी और उस पर सटीक हमला करने में सहायता मिलती है। यह प्रणाली बख्तरबंद वाहनों सहित विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए विकसित की गई है।
अगस्त में पूरे हुए थे तकनीकी परीक्षण:
नागास्त्र-2 ने अगस्त में राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (एमएफएफआर) में तकनीकी परीक्षण पूरे किए थे। कंपनी के मुताबिक, भारतीय सेना की ओर से गठित अधिकारियों के बोर्ड ने प्रणाली की क्षमताओं का प्रदर्शन देखा। इस दौरान निर्धारित परिचालन आवश्यकताओं और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स से जुड़े प्रदर्शन मानकों का परीक्षण किया गया।
कंपनी ने कहा कि परीक्षणों के परिणामों से प्रणाली की तैनाती संबंधी तैयारी की पुष्टि हुई है। नागास्त्र-2 को स्वदेशी तकनीक पर आधारित ऐसा लोइटरिंग म्यूनिशन बताया गया है, जो इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की परिस्थितियों में काम करने, लंबी दूरी तक हमला करने और बख्तरबंद लक्ष्यों को भेदने की क्षमता को एक साथ जोड़ता है।
नागास्त्र-1आर की आपूर्ति के बाद दूसरी बड़ी खेप:
नागास्त्र-2 की आपूर्ति ऐसे समय हुई है, जब इसके एक सप्ताह से कुछ अधिक समय पहले सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ने भारतीय सेना को नागास्त्र-1आर श्रेणी के 450 कम दूरी तक मार करने वाले कामिकाजे ड्रोन सौंपे थे।
कंपनी नागास्त्र श्रृंखला के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के ड्रोन-आधारित हथियारों का निर्माण करती है। नागास्त्र-2 की आपूर्ति से सेना को स्वदेशी तकनीक पर आधारित एक और ऐसी प्रणाली उपलब्ध हुई है, जिसे आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की चुनौतियों और सटीक हमले की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।








