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’21वीं सदी भारत और आसियान की है’; 22वें ASEAN-India समिट में बोले पीएम मोदी, पढ़ें- बड़ी बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (26 अक्टूबर) को मलेशिया में आयोजित 22वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लिया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत हर आपदा में आसियान देशों के साथ खड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि 21वीं सदी भारत और आसियान की सदी है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “थाईलैंड की क्वीन मदर के निधन पर मैं सभी भारतवासियों की ओर से थाईलैंड के राज परिवार और जनता के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।“

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, विदेश मंत्री एस जयशंकर 27 अक्टूबर को कुआलालंपुर में 20वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की ओर से भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “अपने आसियान परिवार के साथ फिर एक बार मुझे जुड़ने का मौका मिला है। मुझे बहुत खुशी हो रही है। आसियान के सफल अध्यक्षता के लिए मैं पीएम अनवर इब्राहिम को बधाई देता हूं। भारत के देश समन्वयक की भूमि का कुशलता से निभाने पर फिलीपींस के राष्ट्रपति मार्कोस का धन्यवाद करता हूं।”

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “इस साल आसियान शिखर सम्मेलन का विषय ‘समावेशीपन और स्थिरता‘ है। यह विषय हमारे साझा प्रयासों में स्पष्ट रूप से दिखती है– चाहें वह डिजिटल समावेशन हो या वर्तमान चुनौतियों के बीच खाद्य सुरक्षा और लचीली आपूर्ति सुनिश्चित करना। भारत इसका समर्थन करता है और इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत हर आपदा में अपने आसियान भागीदारों के साथ हमेशा मजबूती से खड़ा रहा है। HADR, समुद्री सुरक्षा और नीली अर्थव्यवस्था में हमारा सहयोग तेजी से बढ़ रहा है।“

 

उन्होंने कहा, “इसे देखते हुए हम 2026 को ‘आसियान-भारत समुद्री सहयोग का वर्ष‘ घोषित करते हैं। इसके साथ ही हम शिक्षा, पर्यटन, साइंस और टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य, हरित ऊर्जा और साइबर सुरक्षा में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूती से बढ़ावा दे रहे हैं। 21वीं सदी हमारी सदी है। यह भारत और आसियान की सदी है। मुझे विश्वास है कि ‘आसियान सामुदायिक विजन 2045′ और ‘विकसित भारत 2047′ का उद्देश्य पूरी मानवता के लिए एक उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करेगा।“

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “भारत और आसियान मिलकर विश्व की लगभग एक-चौथाई जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं। हम न केवल भूगोल साझा करते हैं, बल्कि गहरे ऐतिहासिक संबंधों और साझे मूल्य के जोड़ से जुड़े हुए हैं। हम वैश्विक दक्षिण का हिस्सा हैं। हमारे बीच न केवल व्यापारिक संबंध हैं, बल्कि सांस्कृतिक संबंध भी हैं। आसियान भारत की एक्ट ईस्ट नीति का मुख्य स्तंभ है। भारत ने हमेशा आसियान की केंद्रीयता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर आसियान के दृष्टिकोण का समर्थन किया है। अनिश्चितता के इस दौर में भारत-आसियान व्यापक रणनीतिक साझेदारी निरंतर मजबूत हुई है। हमारी मज़बूत साझेदारी वैश्विक स्थिरता और विकास का आधार बनकर उभर रही है।”

source : moneycontrol

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