spot_imgspot_img

Latest News

spot_img

Related Posts

बल्लारपुर तहसील की 17 पंचायतों का बोझ केवल 8 ग्राम सेवकों पर

– रिक्त पदों के कारण ग्राम सेवकों पर अतिरिक्त भार, नागरिकों की शिकायतें बढ़ीं

– ग्राम विकास बाधित, बड़ी पंचायतों का काम संभालते-संभालते सेवक थक गए

 चंद्रपुर :- ग्राम विकास एवं समृद्धि का मार्ग ग्राम पंचायत कार्यालय से होकर गुजरता है। कई विकास कार्यों को यहीं से स्वीकृति मिलती है। इसी के माध्यम से गांव समृद्ध होता है। इसके लिए ग्राम स्थानीय समिति और ग्राम सेवक सरकार के सदस्यों के रूप में अपनी भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद, बल्लारपुर तहसील में 17 ग्राम पंचायतों का भार केवल 8 ग्राम सेवकों संभाल रहे हैं। ग्राम सेवकों के रिक्त पदों के कारण ग्राम पंचायतों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सवाल उठ रहा हैं कि नए ग्राम सेवकों की भर्ती कब होगी और प्रत्येक ग्राम पंचायत का प्रशासन कब सुचारु रूप से चलेगा? एक हजार से कम जनसंख्या वाली ग्राम पंचायतों में ग्राम सेवक रहते हैं। वहीं, डेढ़ हजार से अधिक जनसंख्या वाली ग्राम पंचायतों में ग्राम विकास अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं। हालांकि, चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है कि रिक्त पदों का बोझ इन ग्राम सेवकों पर भी पड़ रहा है। जनसंख्या और अर्थव्यवस्था की दृष्टि से बल्लारपुर तहसील में सबसे बड़ी ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें विसापुर, कोठारी और बामनी (दु)

शामिल हैं। ग्राम पंचायत कार्यालय में ग्राम सेवक और ग्राम विकास अधिकारी पर अतिरिक्त भार डाले जाने के कारण विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही है, जबकि ग्राम विकास ही ग्रामों की समृद्धि का मार्ग है। मिलिंद देवगडे के पास कवडजई, पलसगांव और कोरटी मक्ता इन ग्राम पंचायतों के प्रभारी हैं। विकास बोरवार के पास इटोली और किन्ही के प्रभारी हैं, शैलेश रामटेके कलमना और आमड़ी के प्रभारी हैं, सुनील कुंभारे कोठारी और कटवाली के प्रभारी हैं, गणेश कोकोडे विसापुर और बामनी (दु.) के प्रभारी हैं। नैनपाल दुधे हदस्ती और नंदगांव (पोडे) के प्रभारी हैं, सुषमा नंदेश्वर मानोरा, गिलबिली और ईशा वडस्कर दहेली और लावारी का प्रभार है।

जानकारी के अनुसार, गणेश परसुटकर का तबादला राजुरा पंचायत समिति में हो गया है। ऐसे में एक ग्राम सेवक को 2 से 3 ग्रापं का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। प्रभारी ग्राम सेवक कोठारी जैसी बड़ी ग्राम पंचायत का भी कार्यभार संभाल रहे हैं। सरकारी बैठकों, प्रशिक्षण, अन्य कार्यों आदि के कारण ग्राम सेवक ग्राम पंचायतों का कार्यभार संभालते-संभालते थक जाते हैं। कई सरकारी योजनाएं अधिक ग्राम पंचायतों के कार्यभार के कारण ग्राम सेवक को पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है। एक ग्राम पंचायत में समस्या होने पर उन्हें दूसरी ग्राम पंचायत का भी कार्यभार संभालना पड़ता है।

9 पंचायतों का प्रबंधन एक प्रभारी को

ग्राम पंचायत ठीक से काम नहीं कर रही है। इसके चलते नागरिकों की शिकायतें बढ़ रही हैं और वे पंचायत समिति के पास जा रहे हैं। हालांकि, ग्राम सेवकों की कमी है। सप्ताह या पखवाड़े में केवल एक ग्राम सेवक ही आता है। इससे काम करना मुश्किल हो रहा है। इससे गांव का विकास कैसे होगा ऐसा सवाल उपस्थित हो रहा है। ऐसे में ग्राम सेवकों को बड़ी कसरत करनी पड़ रही है। सरकार ने तहसील में खाली पड़ी 9 ग्राम पंचायतों का प्रबंधन प्रभारी को सौंपकर नागरिकों को राहत दी है। खाली ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत अधिकारियों की तत्काल नियुक्ति की मांग जोर पकड़ रही है।

Popular Articles