– 20 की जगह 100 की रफ्तार से दौड़ रहे वाहन, गोरेगांव–मुरदोली जंगल में तेज रफ्तार का कहर, हादसे और वन्यजीवों की मौत से बढ़ी चिंता
गोंदिया :- टाइगर रिजर्व मागों से 20 किमी/घंटे की स्पीड से चलाने के फलक लगाए गए है, लेकिन गोरेगांव-मुरदोली जंगल मार्ग से से वाहन चालक 80 से 100 किमी/घंटे की स्पीड में वाहन दौड़ा रहे है, जो बाघ या अन्य वन्यजीवों सहित यात्रियों के लिए भी बेहद खतरनाक होता है। इसके बावजूद वाहन चालक यातायात नियमों का उल्लंघन कर अपनी जान को खतरे में डाल रहे है। इसी तरह की एक घटना 3 जनवरी को घटित हो चुकी है। जिसमें एक की मौत हुई है, वहीं दूसरा गंभीर रूप से घायल है। इतना ही नहीं तो ठीक इसी दिन कुछ घंटों के बाद इसी मार्ग पर सीएनजी गैस का ट्रक पलट गया था।
इसके पूर्व भी एक कार की चपेट में आकर एक बाघ की मौत हो चुकी है। 20 किमी/घंटे की रफ्तार के लगाए गए फलक तथा यातायात नियमों की ओर अनदेखी कर वाहन चालक खुद की, यात्रियों की तथा वन्यजीवों की जान को खतरा पहुंचा रहे हैं। बता दें कि नागझिरा अभयारण्य के जंगल तथा वन विभाग के जंगल के बीच से गोरेगांव-मुरदोली यह हाईवे मार्ग गुजरता है, जो नागपुर, रायपुर, गोंदिया, बालाघाट को जोड़ता है। मुरदोली यह जंगल मार्ग से हमेशा बाघ, तेंदुए जैसे वन्यजीव विचरण करते है। लेकिन वाहन चालक यातायात नियमों का उल्लंघन करने से अनेक ऐसी घटनाएं घटित हो चुकी है कि वाहनों की चपेट में आने से वन्यजीव की मौत हो गई है, वहीं वाहनों को बचाने के प्रयास में वाहन चालक का संतुलन खो जाता है और दुर्घटना घटित हो जाती है।टाइगर रिजर्व क्षेत्र से होकर गुजरने वाले मार्गों पर वाहन चालकों की लापरवाही वन्यजीवों और यात्रियों दोनों के लिए खतरा बनती जा रही है। गोरेगांव–मुरदोली जंगल मार्ग पर वन विभाग द्वारा 20 किमी प्रति घंटे की गति सीमा के फलक लगाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद वाहन चालक 80 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन दौड़ा रहे हैं। इस मार्ग पर पहले भी कई दुर्घटनाएं घटित हो चुकी हैं। तेज गति के कारण वन्यजीवों के सड़क पार करते समय कुचलने की घटनाएं सामने आई हैं, वहीं अचानक मोड़ और घने जंगल के कारण वाहन चालकों के नियंत्रण खोने से हादसों की आशंका बनी रहती है। स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस पर गंभीर चिंता जताई है।
प्रशासनिक सख्ती की उठी मांग
जानकारों का कहना है कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र संवेदनशील इलाका है, जहां बाघ, हिरण, नीलगाय समेत अन्य वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में तेज रफ्तार वाहन न केवल वन्यजीवों के लिए बल्कि खुद चालकों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकते हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस मार्ग पर स्पीड ब्रेकर, कैमरा निगरानी और नियमित गश्त बढ़ाई जाए, ताकि नियमों का सख्ती से पालन हो सके। वहीं प्रशासन से भी अपेक्षा की जा रही है कि तेज गति से वाहन चलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि टाइगर रिजर्व क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।








