– सैकड़ों करोड़ मिल सकते थे, पर फाइलों में अटका विदर्भ का भविष्य
– नागपुर मेट्रो विस्तार को बजट में ‘स्टॉप’, केंद्रीय निधि पूरी तरह नदारद
नागपुर :- विदर्भ के लिए शायद ही कुछ आवंटित किया गया है, बजट विश्लेषकों का मानना है कि यह क्षेत्र औद्योगिक और अवसंरचनात्मक विकास में लगातार पिछड़ रहा है. यह बजट इस स्थिति को बदलने का एक अवसर था. अगर केंद्र सरकार परियोजनाओं के लंबित मामलों को निपटाने के लिए गंभीर होती है, तो विदर्भ को कई सौ करोड़ रुपये के नए अनुदान मिल सकते थे. 2024 के मध्य में, सरकार ने विदर्भऔर मराठवाड़ा में सिंचाई के लिए 600 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की थी, जिसे बाद में संशोधित करके 400 करोड़ रुपये कर दिया गया, लेकिन ये धनराशि पूरी तरह से उपलब्ध नहीं हो पाई.
पूर्वी विदर्भ में 250,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई के उद्देश्य से शुरू की गई गोसीखुर्द राष्ट्रीय सिंचाई परियोजना, पर्याप्त धनराशि उपलब्ध होने के बावजूद बार-बार निर्धारित समय सीमा से चूक गई है. राज्य सरकार ने हाल ही में इसके पूरा होने की समय सीमा को जून 2026 तक बढ़ा दिया है. केंद्र सरकार द्वारा अंतिम चरण की धनराशि या निगरानी के रूप में विशेष सहायता प्रदान करने से यह परियोजना पूरी हो सकती थी, जिससे नागपुर, वर्धा और भंडारा जिलों के किसानों को राहत मिलेगी. एक और महत्वपूर्ण परियोजना वैननगंगा-नलगंगा नदी को जोड़ने की है, जिससे विदर्भ के कई जिलों को लाभ होगा, लगभग 88,574 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य नागपुर, वर्धा, अमरावती और आसपास के क्षेत्रों में 3.7 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई करना है, जिसके लिए अतिरिक्त पानी को कमी वाले क्षेत्रों में मोड़ा जाएगा. इसे सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन कार्यान्वयन धीमा रहा है.
गोसीखुर्द से वैनगंगा-नलगंगा तक : बड़ी परियोजनाएँ, धीमी रफ्तार
परिवहन संपर्क और महत्वपूर्ण क्षेत्र है. विदर्भ का सबसे बड़ा शहर नागपुर एक लॉजिस्टिक्स हब के रूप में तेजी से विकसित हुआ है, लेकिन अंतर-क्षेत्रीय संपर्क में कमी है. उदाहरण के तौर पर, नागपुर मेट्रो विस्तार (द्वितीय चरण) राज्य सरकार के सहयोग से चल रहा है, लेकिन इसे पर्याप्त केंद्रीय निधि की आवश्यकता है. पिछले वर्ष के बजट में नागपुर मेट्रो के विस्तार के लिए 680 करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया था. इस बार कुछ भी नहीं है किया गया








