– नया नागपुर प्रोजेक्ट के लिए 500 एकड़ अधिग्रहण का किसानों का विरोध
नागपुर/हिंगना :- नया नागपुर क्षेत्र के तहत प्रस्तावित ‘इंटरनेशनल बिजनेस एंड फाइनेंस सेंटर’ (आईबीएफसी) परियोजना के लिए गोधनी (रिठी) और लाडगांव (रिठी) की करीब 500 एकड़ जमीन के अधिग्रहण का 65 किसानों ने विरोध किया है। किसानों ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 की धारा 15 के तहत नागपुर जिलाधिकारी एवं भूमि अधिग्रहण अधिकारी के समक्ष सामूहिक आपत्ति आवेदन प्रस्तुत किया।
18 जुलाई 2026 को जारी प्रारंभिक अधिसूचना के बाद किसानों ने यह आपत्ति दर्ज कराई है। किसानों का कहना है कि प्रस्तावित जमीन अत्यंत उपजाऊ, सिंचित और बहुफसली है तथा यही उनकी आजीविका का मुख्य आधार है। कई खेतों में कुएं, बिजली पंप, मकान और पशुशेड जैसी स्थायी सुविधाएं भी मौजूद हैं। किसानों ने सवाल उठाया कि जब सरकारी जमीन उपलब्ध है, तो निजी और उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण क्यों किया जा रहा है। उन्होंने परियोजना के लिए वैकल्पिक सरकारी जमीन का इस्तेमाल करने की मांग की है।
एसआईए के बिना अधिग्रहण पर सवाल
किसानों ने सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (एसआईए) के बिना भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 10-A के तहत एसआईए से दी गई छूट की कानूनी वैधता की जांच करने की मांग की है। साथ ही, आवश्यकता होने पर एसआईए प्रक्रिया पूरी होने तक अधिग्रहण की कार्रवाई स्थगित रखने की मांग की गई है। किसान प्रमुख किशोर आष्टणकर ने कहा कि एसआईए प्रक्रिया में दी गई छूट के कानूनी आधार पर गंभीर सवाल हैं। किसानों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा और SIA के मुद्दे को लेकर जल्द ही मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में रिट याचिका दायर की जाएगी।
बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजे की मांग
किसानों के अनुसार, समृद्धि महामार्ग और नागपुर शहर के विस्तार के कारण क्षेत्र में जमीनों के बाजार मूल्य में काफी वृद्धि हुई है। इसलिए पुराने रेडी रेकनर दरों के आधार पर मुआवजा देने के बजाय वास्तविक बाजार मूल्य और आसपास के गांवों में जमीन के प्रचलित भाव को ध्यान में रखते हुए उचित मुआवजा दिया जाए।
किसानों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध विकास परियोजना के खिलाफ नहीं है, बल्कि भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता की कमी, उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण और उचित मुआवजा नहीं मिलने की आशंका के खिलाफ है। सामूहिक आपत्ति आवेदन सौंपते समय सभी 65 आपत्तिकर्ता किसान उपस्थित थे।





