spot_imgspot_img

Latest News

spot_img

Related Posts

हर साल 100 करोड़ खर्च, फिर भी सड़कों पर कचरे के ढेर

– नगर निगम पर कोर्ट की तल्ख़ टिप्पणी

– कचरा प्रबंधन पर हाईकोर्ट की सख़्त नज़र

– अब व्हाट्सऐप पर होगी गंदगी की शिकायत : एक हफ्ते में सफाई नहीं तो अफसरों पर कार्रवाई

नागपुर :- शहर में कचरे का मुद्दा उठाया है। बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने खुद एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) फाइल की है ताकि इस बारे में म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को ज़रूरी ऑर्डर दिए जा सकें। एडवोकेट यशोवर्धन सांबरे को पिटीशन की प्रोसिडिंग्स देखने के लिए एमिकस क्यूरी अपॉइंट किया गया है। उन्हें दो हफ़्ते के अंदर पिटीशन तैयार करने को कहा गया है।

गुरुवार को जस्टिस अनिल किलोर और राज वाकोडे के सामने मामले की सुनवाई हुई। वाइस-कैपिटल, जिसने सफाई का अवॉर्ड जीता है, आज म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की लापरवाही की वजह से कचरे में घुट रहा है। शहर का हर चौक, हर बस्ती म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के गैर-ज़िम्मेदार मैनेजमेंट और लोगों के प्रति उसके बेपरवाह रवैये का सबूत है। नागपुर ने देश की सफाई की स्टडी की; लेकिन उससे सीखने के बजाय म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने सिर्फ़ कागज़ की फाइलें भरीं। अगर इंदौर उसी स्टडी में देश में टॉप पर है, तो नागपुर की क्या हालत है? यह 23वें से गिरकर 86वें स्थान पर आ गया है। यह गिरावट कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि बिना प्लान के मैनेजमेंट की निशानी है।

नगर निगम कचरा मैनेजमेंट पर हर महीने 8 करोड़ रुपये से ज़्यादा और हर साल 100 करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च करता है। इतना खर्च करने के बाद भी, कुछ इलाकों में हर दूसरे दिन और कुछ जगहों पर हफ़्ते में सिर्फ़ दो बार कचरा इकट्ठा किया जाता है। शहर में हर दिन 1,300 से 1,400 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। नगर निगम भले ही 100 परसेंट कचरा इकट्ठा करने का दावा करता हो, लेकिन असलियत कुछ और है। कई इलाकों में दिन-ब-दिन कचरा जमा होता रहता है, बदबू फैलती है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। मानसून में स्थिति और भी डरावनी हो जाती है।

हाईकोर्ट ने गुरुवार को नागरिकों को सड़क पर जमा कचरे की सूचना देने के लिए नगर निगम के ज़ोन के हिसाब से व्हाट्सप्प नंबर देने का विचार भी जताया, और नगर निगम के वकील एडवोकेट सुधीर पुराणिक को अगले सोमवार तक ज़िम्मेदार अधिकारियों से इस बारे में जानकारी लेने का निर्देश भी दिया। लोगों की व्हाट्सप्प पर शिकायत के बाद एक हफ़्ते के अंदर कचरा उठाना ज़रूरी होगा; कोर्ट ने यह भी साफ़ किया कि ऐसा न करने पर नगर पालिका के ज़िम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी।

Popular Articles