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150 करोड़ बकाया : कॉन्ट्रैक्टर्स ने रोका नागपुर विंटर सेशन की तैयारियों का पहिया

– सिर्फ 20 करोड़ मिले, कॉन्ट्रैक्टर भड़के ; विधानसभा तैयारी अधर में

– पीडब्ल्यूडी पर दबाव बढ़ा: भुगतान न होने पर मजदूर–इंजीनियर भी उतरे आंदोलन में

नागपुर :- 8 दिसंबर से शुरू होने वाले विधानसभा के विंटर सेशन की तैयारियां शुक्रवार को सचमुच रोक दी गईं। कॉन्ट्रैक्टरों ने 150 करोड़ रुपये के पेंडिंग बिलों के तुरंत पेमेंट की मांग को लेकर शुक्रवार को सारा काम रोक दिया। इसके चलते पीडब्ल्यूडी और विधान भवन एडमिनिस्ट्रेशन ने अपनी कोशिशें बढ़ा दी हैं, और ऐसे में सवाल उठ रहा है कि तैयारियों के लिए 1 दिसंबर की आखिरी डेडलाइन कैसे पूरी होगी। पिछले साल हुए सेशन के कामों के करीब 150 करोड़ रुपये के बिल अभी भी पेंडिंग हैं। इन बकाया बिलों की वजह से कॉन्ट्रैक्टरों ने महीने की शुरुआत में काम रोको आंदोलन शुरू किया था। मुख्यमंत्री और सीनियर अधिकारियों से जल्द पैसे देने का भरोसा मिलने के बाद उन्होंने काम फिर से शुरू किया। हालांकि, गुरुवार को 150 करोड़ में से सिर्फ 20 करोड़ रुपये मिलने पर कॉन्ट्रैक्टर नाराज हो गए। उन्होंने इमरजेंसी मीटिंग में काम रोकने का फैसला किया। शुक्रवार सुबह कॉन्ट्रैक्टर्स के ग्रुप रवि भवन, एमएलए निवास, हैदराबाद हाउस, विधान भवन वगैरह जगहों पर पहुंचे और काम रुकवा दिया। दोपहर तक सारा काम पूरी तरह से रुक गया।

नागपुर कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन ने पीडब्लूडी के सीनियर अधिकारियों और मुख्यमंत्री ऑफिस की सेक्रेटरी आशा पठान को एक मेमोरेंडम लिखकर कहा है कि बकाया पेमेंट करने का वादा पूरा नहीं किया गया है। इस वजह से कन्वेंशन की तैयारियां फिर से रोक दी गई हैं। कॉन्ट्रैक्टर्स के साथ-साथ पढ़े-लिखे बेरोजगार इंजीनियर और लेबर सोसाइटी भी इस आंदोलन में हिस्सा ले रहे हैं। आरोप है कि 150 करोड़ के पेमेंट के बदले 20 करोड़ भेजकर कॉन्ट्रैक्टर्स का मज़ाक उड़ाया गया। मेमोरेंडम में साफ कहा गया है कि अगर कन्वेंशन का काम समय पर पूरा नहीं हुआ तो इसकी जिम्मेदारी पीडब्लूडी की रहेगी।

वादा अधूरा, काम बंद: कॉन्ट्रैक्टर्स बोले—75 करोड़ दो, तभी दोबारा शुरू करेंगे काम

काम रुकने के बाद पीडब्ल्यूडी एडमिनिस्ट्रेशन में हड़कंप मच गया। चीफ इंजीनियर संभाजी माने और जनार्दन भानुसे ने कॉन्ट्रैक्टर्स से बातचीत की। शाम को भानुसे के ऑफिस में हुई मीटिंग में उनसे मंगलवार तक और 23 करोड़ देने का वादा किया गया। लेकिन, कॉन्ट्रैक्टर इससे खुश नहीं थे। वे कम से कम 50 परसेंट (75 करोड़ रुपये) से कम पर तैयार नहीं थे।

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