नागपुर :- उपमुख्यमंत्री अजित पवार की अगुवाई वाली सत्ताधारी राष्ट्रवादी कांग्रेस ने नागपुर में आयोजित दो दिवसीय ‘राष्ट्रवादी चिंतन शिविर’ में आगामी मिशन 2025 का रोडमैप तैयार किया है। शिविर के लिए दस अलग-अलग समितियाँ बनाई गईं और हर समिति को विशिष्ट विषय सौंपा गया। लेकिन इस बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और ओबीसी समाज के दमदार नेता छगन भुजबळ को मंच से न तो कोई विषय रखने का अवसर मिला और न ही किसी समिति में स्थान। इससे राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि भुजबळ की उपेक्षा जानबूझकर की गई या उनकी ताक़त कम करने की कोशिश हो रही है।
विदर्भ क्षेत्र में ओबीसी समाज की बड़ी जनसंख्या है। ऐसे समय में जब राज्य सरकार ने हैदराबाद गजट के आधार पर मराठा समाज को कुणबी जाति प्रमाणपत्र देने का फ़ैसला लिया है, तब इस शिविर में भुजबळ को दरकिनार किया जाना कई सवाल खड़े कर रहा है।
शिविर की मुख्य समितियाँ और विषय
संविधान और लोकतंत्र: दिलीप वळसे पाटील की शिवनेरी समिति
सामाजिक न्याय व सर्वसमावेशक राजनीति: नरहरी झिरवाळ की रायगड समिति
महिला सशक्तिकरण: अदिती तटकरे की कळसुबाई समिति
युवा व छात्र नेतृत्व: इंद्रनील नाइक की विजयदुर्ग समिति
कृषि और किसानों के अधिकार: दत्तात्रय भरणे की पन्हाळा समिति
सहकार व ग्रामीण अर्थव्यवस्था: अमरसिंह पंडित की राजगड समिति
अर्थव्यवस्था, उद्योग और रोजगार: अनिल भाईदास पाटील की अजिंक्यतारा समिति
शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन: नवाब मलिक की देवगिरी समिति
संगठन व संवाद: धनंजय मुंडे की रामटेक समिति
राष्ट्रीय रणनीति व चुनावी नीति: सुनेत्रा पवार की सिंहगड समिति
इस शिविर में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर गहन चर्चा की जा रही है। लेकिन छगन भुजबळ की गैरमौजूदगी से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या पार्टी नेतृत्व में उनकी भूमिका हाशिये पर धकेली जा रही है।




