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विदर्भ का हृदय खतरे में – वोक्हार्ट हॉस्पिटल्स के सर्वेक्षण से चौंकाने वाले निष्कर्ष

– मध्यम आयु और युवा मरीजों में हृदय रोग का बढ़ता खतरा, इलाज के लिए देर से पहुंचने से बचने की संभावना कम

नागपुर :- एक जिम्मेदार कॉर्पोरेट के रूप में, वोक्हार्ट हॉस्पिटल्स, नागपुर ने नागपुर और आस-पास के क्षेत्रों के डॉक्टरों के साथ एक महीने का हार्ट हेल्थ इनसाइट्स सर्वे किया। इसमें कार्डियोलॉजिस्ट, जनरल प्रैक्टिशनर और रेसिडेंट मेडिकल ऑफिसर (आरएमओ) शामिल थे, इस सर्वेक्षण से मध्य भारत में हृदय रोग से जुड़े चुनौतियों की पूरी तस्वीर सामने आई।

सर्वेक्षण के निष्कर्ष चिंताजनक हैं: हृदय रोग अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा। अधिकांश डॉक्टरों के अनुसार 41–60 वर्ष के मरीजों की संख्या ज्यादा हैं, जबकि कई डॉक्टरों ने देखा कि 30 साल की उम्र के युवा भी हृदय संबंधी समस्याओं के साथ हॉस्पिटल पहुंच रहे हैं।

डॉ. नितिन तिवारी, सिनियर कार्डियोलॉजिस्ट, वोक्हार्ट हॉस्पिटल्स, नागपुर ने बताया, “दस साल पहले, नागपुर में 30 साल के मरीजों को कार्डियक समस्याओं के लिए हॉस्पिटल में देखना दुर्लभ था। आज तनावपूर्ण काम, गलत जीवनशैली और समय पर जांच न होने के कारण युवा मरीज दिल का दौरा पड़ने के बाद हॉस्पिटल में भर्ती हो रहे हैं। यह एक चेतावनी है।”

सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि रोकथाम के लिए हृदय की नियमित जांच अभी भी नहीं हो रही है। कई डॉक्टरों ने बताया कि मरीज केवल लक्षण दिखाई देने के बाद ही हॉस्पिटल आते हैं, जबकि रोकथाम के लिए जांच कराने वाले बहुत कम हैं।

डॉ. सुमित नारंग, सिनियर सीवीटीएस सर्जन, वोक्हार्ट हॉस्पिटल्स, नागपुर ने बताया “आज की प्रतिस्पर्धात्मक दुनिया में चाहे कार्यस्थल हो या घर दोनों जगह युवाओं पर अत्यधिकतनाव होता है, जिससे नींद की गुणवत्ता खराब होती है और हृदय रोग का खतरा बढ़ता है।”

डॉ. दिनेश पडोले, कार्डियोलॉजिस्ट, वोक्हार्ट हॉस्पिटल्स, नागपुर ने बताया, “शहरीकरण, बैठकर काम करने की आदत, पेट की चर्बी, बदलता खान-पान, बढ़ता वायु प्रदूषण, तनाव, अपर्याप्त नींद, जल्दी शुरू होने वाली डायबिटीज और आनुवंशिक कारण ये सभी कारक भारतीय मरीजों में कम उम्र में हृदय रोग होने के प्रमुख कारण बन रहे हैं”।

डॉ. अमित बल्लमवार, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, वोक्हार्ट हॉस्पिटल्स, नागपुर ने बताया, “मरीजों में रोकथाम के लिए नियमित जांच की आदत अभी भी नहीं है। जब मरीज हॉस्पिटल पहुंचते हैं, तब अक्सर हम वह सुनहरा समय खो देते हैं जो जीवन बचा सकता था। जागरूकता और समय पर जांच ही असली आवश्यकता है।”

एक और चिंता की बात यह है कि जागरूकता की कमी है। दो-तिहाई से अधिक डॉक्टरों ने बताया कि मरीजों को अपना ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर लेवल की पूरी जानकारी नहीं होती। आधे से अधिक डॉक्टरों ने यह भी देखा कि मरीज हृदय रोग के शुरुआती लक्षण जैसे छाती में दर्द, पसीना आना या सांस लेने में तकलीफ को पहचान नहीं पाते।

रवि बगली, सेंटर हेड, वोक्हार्ट हॉस्पिटल्स, नागपुर ने बताया, यह सर्वेक्षण नागपुर की वास्तविक परिस्थितियों को दर्शाता है। जागरूकता, तेजी और उपचार की उपलब्धता ये तीन महत्वपूर्ण पहलू हैं। वोक्हार्ट में हम डॉक्टरों, समाज और मीडिया की मदद से इस अंतर को कम करने का प्रयास कर रहे हैं और विदर्भ के मरीजों के स्वास्थ्य में सुधार करना हमारी जिम्मेदारी मानते हैं।”

कुल मिलाकर, सर्वेक्षण ने पश्चिम भारत के मुंबई शहर, एमएमआर, राजकोट और नागपुर को कवर किया, जिसमें लगभग 326 डॉक्टरों ने भाग लिया। इसमें से नागपुर के 48 डॉक्टरों ने से अपनी प्रतिक्रियाएँ दीं, और यह रिपोर्ट उनके विचारों पर आधारित है।

वोक्हार्ट हॉस्पिटल्स लिमिटेड के बारे में:

वोक्हार्ट हॉस्पिटल्स लिमिटेड एक टर्शियरी केयर सुपर-स्पेशलिटी हॉस्पिटल की श्रृंखला है, जिनकी सुविधाएँ नागपुर, राजकोट, साउथ मुंबई और नॉर्थ मुंबई में उपलब्ध हैं। अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक मानक प्रक्रियाओं के लिए प्रसिद्ध, वोक्हार्ट हॉस्पिटल्स मरीजों की सुरक्षा और गुणवत्ता वाले इलाज को प्राथमिकता देता है। इसका उद्देश्य मरीजों के जीवन की गुणवत्ता को सुधारना और बेहतर सेवा देना है, जिससे यह देश के कुछ पेशेवर रूप से प्रबंधित कॉर्पोरेट हॉस्पिटल में शामिल है।

सर्वेक्षण के निष्कर्ष (वोक्हार्ट हॉस्पिटल्स डॉक्टरों की विशेष टिप्पणियाँ)

पिछले साल हृदय रोगियों में लिंग वितरण कैसा रहा?

70% से अधिक डॉक्टरों ने कहा कि हृदय संबंधी समस्याएँ मुख्य रूप से पुरुषों में पाया जाता हैं।

टिप्पणी: पुरुष अधिक संवेदनशील हैं, लेकिन महिलाओं में भी हृदय रोग बढ़ रहा है।

सबसे अधिक प्रभावित उम्र का समूह कौन सा है?

80% से अधिक डॉक्टरों ने कहा कि मध्य आयु वर्ग (41–60 वर्ष) के मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित है।

कुछ डॉक्टरों ने वरिष्ठ नागरिकों (60+) की ओर भी इशारा किया।

टिप्पणी: मध्य आयु वर्ग सबसे जोखिम भरा है, वरिष्ठ नागरिक भी खतरे में हैं।

क्या पिछले 5 वर्षों में 40 वर्ष से कम उम्र के मरीजों में हृदय रोग बढ़ा है?

अधिकांश डॉक्टरों ने कहा कि इस उम्र वर्ग में मरीजों की संख्या स्पष्ट या थोड़ी है।

टिप्पणी: डॉक्टरों को स्पष्ट रूप से युवा मरीजों की संख्या बढ़ती दिखाई दे रही है ।

डॉक्टरों के अनुसार उनके क्षेत्र में हृदय रोग के मुख्य कारण क्या हैं?

लगभग सभी ने कहा कि तनाव, लंबे समय तक बैठकर काम करना, गलत आहार, धूम्रपान और मधुमेह मुख्य कारण हैं ।

टिप्पणी: नागपुर में हृदय रोग जीवनशैली और मेटाबोलिक से संबंधित कारकों के कारण होता है।

क्या मरीज आम तौर पर रोकथाम के लिए जांच कराते हैं या केवल लक्षण दिखने पर?

अधिकांश डॉक्टरों ने कहा कि मरीज ज्यादातर लक्षण दिखने के बाद ही आते हैं।

टिप्पणी: नागपुर में रोकथाम के प्रति जागरूकता अभी भी बहुत कम है।

मरीज उनके ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर लेवल के बारे में कितनी जानकारी हैं?

डॉक्टरों ने कहा कि जानकारी अक्सर अधूरी होती है ।

टिप्पणी: मरीज अक्सर “अधूरी जानकारी पर भरोसा करते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा है ।

हृदय संबंधी आपात स्थिति में, मरीज कितनी जल्दी अस्पताल पहुँचते हैं (गोल्डन ऑवर में)?

अधिकांश डॉक्टरों ने कहा “कभी-कभी” या “कभी नहीं”।

टिप्पणी: इलाज में देर होने के कारण जीवन बचाने का मौका कम हो जाता है ।

मरीज हृदय रोग के शुरुआती लक्षण कितने पहचान पाते है?

अधिकांश डॉक्टरों ने कहा कि जागरूकता आंशिक है, कुछ ने कम होने की बात कही ।

टिप्पणी: कई मरीज छाती में दर्द या आने को हृदय रोग से संबंधित नहीं समझते, जो खतरनाक हो सकता है ।

हृदय रोग के समय पर इलाज में सबसे बड़ी बाधाएँ क्या हैं?

कई डॉक्टरों ने आर्थिक या सुविधाओं से जुड़े अड़चनें बताईं, कुछ ने हृदय रोग की देर से पहचान और आपातकालीन प्रतिक्रिया कम होने का उल्लेख किया ।

टिप्पणी: नागपुर में आर्थिक समस्या और जागरूकता की कमी के कारण इलाज में देरी होती है।

भारत में हृदय रोग कम करने के लिए किस रोकथाम रणनीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए?

अधिकांश: जीवनशैली में बदलाव (आहार, व्यायाम, तंबाकू से परहेज़)।

अन्य: नियमित रोकथाम जांच और बेहतर सुविधाएँ।

टिप्पणी: डॉक्टरों का कहना है कि रोकथाम ही दीर्घकालीन उपाय है।


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