– नागपुर-वर्धा में बिजली संकट की आशंका
नागपुर :- बिजली क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ, महाराष्ट्र राज्य विद्युत कर्मचारी, अभियंता एवं अधिकारी कार्य समिति के नेतृत्व में तीनों सरकारी बिजली कंपनियों, महावितरण, महानिर्माण और महापारेषण के अधिकारी-कर्मचारी बुधवार आधी रात से हड़ताल पर चले गए हैं। इसलिए, अगले तीन दिनों तक तीनों कंपनियों में बिजली व्यवस्था का पूरा भार उन संविदा कर्मचारियों पर रहेगा जो हड़ताल पर नहीं हैं। इस दौरान अगर कोई गंभीर तकनीकी खराबी आती है, तो घंटों बिजली गुल रहने का खतरा है। राज्य में कई अधिकारी-कर्मचारी बुधवार रात 12 बजे हड़ताल पर चले गए और बिजली कंपनियों व सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने चेतावनी दी कि वे बिजली कंपनियों का निजीकरण बर्दाश्त नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री देवेंद्र फडणवीस के वर्धा जिले सहित नागपुर जिले में महावितरण के करीब साढ़े पांच हजार अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से, सर्वोच्च पदों पर बैठे चुनिंदा अधिकारियों को छोड़कर, 90 प्रतिशत से ज़्यादा अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल पर हैं, ऐसा एक्शन कमेटी का दावा है। महानिमती के कोराडी और खापरखेड़ा ताप विद्युत परियोजनाओं के साथ-साथ महापारेषण में भी स्थिति यही रहेगी। इस बीच, नागपुर और वर्धा जिलों में पिछले कुछ दिनों से तेज़ हवाओं के साथ रुक-रुक कर बारिश हो रही है। ऐसे में, अगर बिजली व्यवस्था में कोई गंभीर खराबी आती है, तो हड़ताल से मरम्मत कार्य में बड़ी मुश्किलें आने की संभावना है।
महावितरण में सात बिजली कर्मचारी संघों की संयुक्त कार्रवाई समिति द्वारा 9 से 11 अक्टूबर तक आहूत हड़ताल के दौरान सुचारू बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए महावितरण ने राज्य भर में अपनी व्यवस्थाएँ तैयार रखी हैं। गंभीर कारणों से ली गई छुट्टियों को छोड़कर, सभी इंजीनियरों, अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियाँ रद्द कर दी गई हैं। छुट्टी पर गए कर्मचारियों को तुरंत काम पर लौटने का निर्देश दिया गया है। प्रबंधन द्वारा बार-बार चर्चा और अपील के बावजूद, संयुक्त कार्रवाई समिति ने हड़ताल के निर्णय को बरकरार रखा है। चूँकि बिजली एक आवश्यक सेवा है, इसलिए नागरिकों को असुविधा से बचाने के लिए महाराष्ट्र आवश्यक सेवा संरक्षण अधिनियम (मेस्मा) लागू किया गया है और इस हड़ताल को अवैध घोषित किया गया है। निजीकरण और पुनर्गठन के मुद्दों पर सात बिजली कर्मचारी संघों की संयुक्त कार्रवाई समिति ने तीन दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया है।
तकनीकी खराबी पर बढ़ा ब्लैकआउट का खतरा
ऊर्जा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव आभा शुक्ला और महावितरण के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक लोकेश चंद्र ने कार्रवाई समिति के पदाधिकारियों के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। इन बैठकों में स्पष्ट रूप से आश्वासन दिया गया कि निजीकरण नहीं होगा। प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया कि महावितरण कंपनी के 329 उपकेंद्रों का संचालन अनुबंध के आधार पर शुरू होने का आरोप भी गलत है। अप्रैल 2019 के बाद निर्मित 329 उपकेंद्रों का निजीकरण नहीं किया गया है। ये उपकेंद्र महावितरण के संबंधित कार्यालयों के अधिकार क्षेत्र में हैं। इन उपकेंद्रों में केवल बाहरी कुशल जनशक्ति के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और इस संबंध में संबंधित एजेंसियों को कार्यादेश दिए जा चुके हैं। यह स्पष्ट किया गया कि इसमें किसी भी प्रकार का निजीकरण नहीं है।








