नक्सलवाद को सबसे बड़ा झटका

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– गढ़चिरोली के बाद अब छत्तीसगढ़ में 200 से ज़्यादा नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण!

गढ़चिरौली :- दो दिन पहले गढ़चिरौली ज़िले में नक्सल आंदोलन के एक प्रमुख नेता भूपति और उनके 60 साथियों के आत्मसमर्पण की ऐतिहासिक घटना के बाद, आज छत्तीसगढ़ के बस्तर में 200 से ज़्यादा नक्सली हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल होंगे। इस घटना ने मध्य भारत में नक्सल आंदोलन की कमर तोड़ दी है और इसे सरकार की आत्मसमर्पण योजना की अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक सफलता माना जा रहा है। इन आत्मसमर्पण करने वालों में दंडकारण्य डिवीज़नल कमेटी के एक प्रमुख नेता रूपेश भी शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि गढ़चिरौली में भूपति के आत्मसमर्पण के बाद, रूपेश उनके फैसले का सार्वजनिक रूप से समर्थन करने वाले पहले नेता थे। रूपेश के इस रुख के बाद आंदोलन में एक बड़ी फूट पैदा हो गई थी और आज के इस बड़े आत्मसमर्पण का नतीजा निकला है।

यह ऐतिहासिक समारोह आज, शुक्रवार, 17 अक्टूबर को सुबह 11 बजे जगदलपुर स्थित रिज़र्व पुलिस लाइन्स मैदान में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा की उपस्थिति में आयोजित हुआ। सरकार ने कहा कि यह राज्य सरकार द्वारा ‘शांति, संवाद और विकास’ के तीन सिद्धांतों पर आधारित व्यापक नक्सल-विरोधी नीति के कारण ही संभव हो पाया है। इस नीति से उत्पन्न विश्वास और पुनर्वास के माहौल के कारण, कई कट्टर नक्सली अब हिंसा का रास्ता छोड़ने को तैयार हैं।

अंततः रूपेश ने अपने 200 से ज़्यादा साथियों के साथ आज आत्मसमर्पण करने का फ़ैसला किया, जिससे गढ़चिरौली से लेकर बस्तर तक पूरे दंडकारण्य क्षेत्र में नक्सलियों को भारी नुकसान हुआ है। इन दो बड़ी घटनाओं ने नक्सल आंदोलन में आंतरिक फूट, नेतृत्व में अविश्वास और हिंसा के रास्ते की निरर्थकता को स्पष्ट रूप से उजागर कर दिया है। इस ऐतिहासिक सफलता को नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।