देवलापार :- हमेशा विवादों में रही देवलापार ग्राम पंचायत के सरपंच और छह सदस्यों को एक साथ अयोग्य घोषित किए जाने से स्थानीय राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। ग्राम सभा द्वारा लिए गए निर्णय को मासिक बैठक में बदलना उन्हें भारी पड़ गया। अयोग्य घोषित किए गए सदस्यों में सरपंच सारिका विनोद उइके, सदस्य रामरतन मोतीराम गजभिये, प्रमोद नामदेव कुमरे, लक्ष्मण हरि राउत, सुधाकर जादू भलावी, मोनिका मधुकर पोहरे, रंजना यादवराव वरठी शामिल हैं। उपसरपंच विनोद शिवलाल मसराम, सदस्य प्रणाली जितेंद्र सरोदे और शिल्पा मुकेश पेंदाम ने इस संबंध में एक आवेदन प्रस्तुत किया था। गाँव में गुणवत्तापूर्ण विकास कार्य सुनिश्चित करने के लिए, उपरोक्त आवेदकों ने 31 अगस्त 2023 की ग्राम सभा में प्रस्ताव संख्या 7 के अनुसार कार्यों की बी-1 यानी ई-टेंडरिंग का मुद्दा उठाया था। सभी ने इस पर सहमति व्यक्त की थी। 21 सितंबर 2023 की मासिक बैठक में अयोग्य घोषित किए गए सदस्योंने
मासिक बैठक में ग्राम सभा के प्रस्ताव को बदल दिया जो उन्हें भारी पड़ गया।
मामले में विकास कार्यों की ई-टेंडरिंग किए बिना ही बी-2 में कार्य करने का निर्णय लिया गया। इस दौरान आवेदक सदस्यों की राय पर विचार नहीं किया गया। साथ ही, ग्राम पंचायत अधिकारी ने भी इसे गलत नहीं बताया। आवेदकों ने इस कृत्य को गलत बताते हुए शिकायत की। लेकिन इस संबंध में कई बार राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की गई। इसके अलावा, बिना प्रस्ताव पारित किए वकीलों को पैसे देने, प्रस्ताव में छेड़छाड़ कर अन्य सामग्री डालने जैसे कई आरोप लगाए गए। 15 अक्टूबर के आदेश के अनुसार, अपर आयुक्त डॉ. माधवी खोड़े ने यह निर्णय दिया। उन्होंने मुख्य कार्यपालन अधिकारी को ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने के भी आदेश दिए। इसमें ग्राम पंचायत अधिनियम 1959 की धारा 39(1) के तहत उपरोक्त सदस्यों को अगले छह वर्षों के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है। आवेदकों की ओर से अधिवक्ता मुकेश पेंदाम और अनावेदकों की ओर से अधिवक्ता भोजराज धांधले ने पैरवी की।








