– यवतमाल सहकारी बैंक में फिर उठा भ्रष्टाचार का मामला
यवतमाल :- जिला केंद्रीय सहकारी बैंक में वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले से ही एसएलआर डिफॉल्ट और 54 प्रतिशत से अधिक एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) के बोझ तले दबे इस बैंक में अब एक बार फिर अवैध भर्ती प्रक्रिया शुरू किए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन भर्तियों में चयन के नाम पर 35 से 50 लाख रुपये तक की रिश्वत मांगी जा रही है। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब बैंक के खिलाफ पहले से ही किसानों के करोड़ों रुपये के गबन और कर्ज घोटाले की जांच अधर में लटकी हुई है। किसान नेता किशोर तिवारी ने इस पूरे मामले की जांच और कार्रवाई की मांग करते हुए रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया, सीबीआई और केंद्रीय सहकारिता सचिव के समक्ष एक कानूनी याचिका दायर की है।
उन्होंने अपनी शिकायत में कहा है कि, “यवतमाल जिला केंद्रीय सहकारी बैंक, जो किसानों की आर्थिक रीढ़ माना जाता है, वह भ्रष्टाचार की जड़ बन चुका है। अगर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई, तो यह संस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएगी। किशोर तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि बैंक के शीर्ष अधिकारी और प्रबंधन समिति के सदस्य मिलीभगत से भर्ती और ऋण वितरण में भारी हेराफेरी कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि बैंक की वर्तमान कार्यप्रणाली पर तत्काल विशेष ऑडिट कराया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएँ। बैंक की दुर्दशा का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि एनपीए का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे किसानों को कर्ज उपलब्ध कराना कठिन हो गया है। इसके अलावा, निवेशकों और शेयरधारकों का भरोसा भी डगमगाने लगा है। स्थानीय किसानों और सहकारी क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि केंद्र और राज्य सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया तो बैंक की वित्तीय स्थिति पूरी तरह से चरमरा सकती है।




