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सोयाबीन ख़रीद में असमंजस बरकरार

– एमआरपी तय न होने से किसानों में गहरी चिंता

अमरावती :- राज्य में इस साल सोयाबीन की ख़रीद प्रक्रिया को लेकर फिर एक बार असमंजस की स्थिति बनी हुई है। किसानों ने मेहनत से तैयार की गई उपज को बाज़ार में बेचने की तैयारी तो कर ली है, लेकिन एमआरपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर सरकारी ख़रीद कब शुरू होगी — इस पर अब तक कोई स्पष्ट निर्देश जारी नहीं हुए हैं। पिछले वर्ष सरकार ने अक्टूबर महीने में किसानों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसके बाद एमआरपी ख़रीद केंद्रों पर सोयाबीन की ख़रीद की गई थी। मगर इस बार, ज़िला स्तर पर आदेश जारी न होने के कारण किसानों में भारी अनिश्चितता और निराशा का माहौल है।

कई किसानों ने बताया कि उन्होंने बाज़ार में कम दाम मिलने के डर से सोयाबीन की बिक्री रोक रखी है। वहीं, लगातार गिरते बाज़ार भाव और बढ़ते कर्ज़ ने किसानों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर डाला है। ग्रामीण इलाक़ों में खरीद केंद्रों के शुरू न होने से व्यापारी किसानों को एमआरपी से 400 से 600 रुपये प्रति क्विंटल कम दाम पर खरीद का प्रस्ताव दे रहे हैं।

किसानों का कहना है कि अगर सरकार जल्द कदम नहीं उठाती, तो उन्हें मजबूर होकर सोयाबीन औने-पौने दामों में बेचना पड़ेगा। इस स्थिति से न सिर्फ़ उनकी आमदनी घटेगी, बल्कि आगामी रबी सीज़न की तैयारी पर भी असर पड़ेगा। कृषि विभाग के सूत्रों का कहना है कि सरकार ने इस साल एमआरपी तय करने और ख़रीद केंद्रों की संख्या बढ़ाने पर चर्चा की है, लेकिन अब तक इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।

किसानों ने राज्य सरकार से तुरंत एमआरपी घोषित करने और ख़रीद केंद्र शुरू करने की मांग की है, ताकि उन्हें अपनी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।

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