– राज्य सरकार सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस
नागपुर :- शहर में यात्री ई-रिक्शा द्वारा कानूनों के लगातार उल्लंघन और नियमों की अनदेखी के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में शहर की यातायात व्यवस्था का उल्लंघन सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में अदालत ने राज्य के परिवहन मंत्रालय के प्रधान सचिव, पुलिस आयुक्त, नागपुर, जिलाधिकारी, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी और मनपा आयुक्त को नोटिस जारी कर 10 सप्ताह में जवाब मांगा है। सामाजिक कार्यकर्ता परमजीत सिंह कलसी ने यह जनहित याचिका दायर की है। याचिका पर न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई।
याचिका में याचिकाकर्ता ने ई-रिक्शा संचालन से संबंधित सात प्रमुख समस्याओं को उजागर किया है, जो शहर की यातायात व्यवस्था और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं। इन समस्याओं में ई-रिक्शा द्वारा प्रतिबंधित क्षेत्रों में मनमाने ढंग से परिचालन करना, बिना मीटर के ई-रिक्शा चलाने के कानूनी आदेश की अवहेलना करना और शहर में पंजीकृत यात्री ई-रिक्शा की संख्या की तुलना में यात्री ई-रिक्शा स्टैंड की अत्यधिक कमी शामिल है। इसके अलावा ई-रिक्शा चालकों द्वारा बिना ड्राइविंग लाइसेंस और फिटनेस सर्टिफिकेट के वाहन चलाना, इन अनिवार्य दस्तावेजों से जुड़े नियमों का उल्लंघन करना चिंता का प्रमुख विषय है।
नियमित कार्रवाई कर जुर्माना लगाएं: याचिकाकर्ता ने प्रतिवादियों पर नागरिकों के मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 14, 19 (1) (डी), और 21) के उल्लंघन को संबोधित करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। याचिका में प्रतिवादियों को इन उत्लंघनों को प्रभावी ढंग से रोकने और नागपुर की जनता के अधिकारों की रक्षा करने के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की गई है। इसके अलावा अदालत से आरटीए के प्रस्ताव का सख्ती से पालन कराने, प्रवेश निषेध क्षेत्रों में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात करने एवं सीसीटीवी से नियमित कार्रवाई करने और बिना फिटनेस सर्टिफिकेट वाले सभी ई-रिक्शा की जांच कर जुर्माना लगाने, दैनिक पेनल्टी तथा जब्ती की कार्रवाई करने के निर्देश देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से एड. अनिकेत सावल ने पैरवी की।
केवल 1483 फिटनेस सर्टिफिकेट का नवीनीकरण
याचिकाकर्ता ने बताया कि, नागपुर में 13,395 पंजीकृत ई-रिक्शा है, लेकिन केवल 1,483 फिटनेस सर्टिफिकेट का ही नवीनीकरण हुआ है। कानून (नियम-32 एवं 62, सीएमवीआर 1989) के अनुसार हर 3 साल में विस्तृत जांच के बाद ही फिटनेस नवीनीकरण अनिवार्य है। इससे स्पष्ट है कि, शहर में अधिकांश ई-रिक्शा बिना वैध फिटनेस के चल रहे हैं, जो कानून का उल्लंघन होने के साथ-साथ आम जनता के जीवन के लिए गंभीर खतरा है।




