चंद्रपुर :- 13 सालों से स्थायी दर्जा पाने के लिए कानूनी संघर्ष कर रहे महावितरण के ठेका कामगारों को अंततः न्याय मिला है. औद्योगिक न्यायालय ने उन्हें परमानेंट करने के आदेश दिये हैं. इन आदेशों में कामगारों को सीधे व स्थायी माना जाएगा, ऐसा स्पष्ट किया गया है. यहीं नहीं, कोर्ट ने माना है कि ठेकेदारी पध्दति केवल नाम की या नकली है. इस फ़ैसले से ठेकेदारी के गलत ट्रेंड पर असरदार तरीके से नियंत्रण होगा और ठेकेदार तथा मुख्य कार्यसेवक दोनों को जिम्मेदार ठहराने का रास्ता साफ़ हो गया है. इस केस में कामगारों की तरफ़ से 10 और मैनेजमेंट की तरफ़ से 2 गवाहों के बयान रिकॉर्ड किए गए थे. इस संबंध में महाराष्ट्र बिजली ठेका कामगार यूनियन ने यहा जारी विज्ञप्ति में बताया है कि 2012 में, महाराष्ट्र बिजली ठेका कामगार यूनियन से जुड़े भारतीय मजदूर संघ ने मुंबई उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. जिसमें पिटीशन 5656/2012 फाइल की थी. मुंबई उच्च न्यायालय के आदेश से, यह केस औद्योगिक न्यायालय, ठाणे को सौंप दिया गया था. अदालत का फैसला बुधवार, 10 दिसंबर को औद्योगिक मामलों के कामगार उपायुक्त एल.वाई. भुजबल, द्वारा संगठन को आधिकारिक रुप से दिया गया. इस मौके पर, संगठन के अध्यक्ष नीलेश खरात समेत अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे.
महावितरण के 2,285 ठेका श्रमिक होंगे स्थायी









