– महापौर किस संवर्ग से होगा—सस्पेंस बरकरार
नागपुर :- मनपा चुनाव की घोषणा हो चुकी है और राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं, लेकिन महापौर पद के लिए आरक्षण, जो चुनावों का मुख्य मुद्दा है, अभी तक तय नहीं हो पाया है कि इस बार किस संवर्ग से महापौर होंगा. मनपा चुनाव घोषित हो चुके हैं और मतदान अगले वर्ष 15 जनवरी को होगा. राज्य चुनाव आयोग ने प्रभाग संरचना के साथ-साथ महिलाओं के लिए 5० प्रतिशत आरक्षण और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की घोषणा कर दी है. हालांकि, मनपा की राजनीति में सबसे महत्वपूर्ण पद, महापौर के लिए आरक्षण की घोषणा अभी तक नहीं की गई है, इसलिए इस बात को लेकर काफी उत्सुकता है कि महापौर किस संवर्ग से होंगा.
मनपा चुनाव केवल पार्षदों के चुनाव तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें महापौर पद के लिए भी प्रतिस्पर्धा होती है, जो शहर के प्रशासन की दिशा तय करता है. इसके बावजूद, चुनाव की घोषणा हो जाने के बाद भी, यह स्पष्ट नहीं है कि इस बार महापौर पद किस संवर्ग के लिए आरक्षित होगा.क्योंकि इस पद के लिए अभी तक कोई आरक्षण नहीं किया गया है. चुनाव प्रचार में महापौर पद का चेहरा महत्वपूर्ण होता है. चूंकि मतदाता मतदान के समय यह जान लेते हैं कि महापौर किस संवर्ग से चुना जाएंगा. इसलिए इसका उनके मतदान पर भी प्रभाव पडऩे की संभावना है.
पार्षद के पदों के लिए आरक्षण हेतु लॉटरी निकाली जाती है
न केवल मतदाताओं पर, बल्कि इस वर्ष महापौर पद के लिए आरक्षण न होने के कारण यह पद अभी तक खाली है.
राज्य चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, पार्षद के पदों के लिए आरक्षण हेतु लॉटरी निकाली जाती है. हालांकि, महापौर पद के लिए आरक्षण पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे कई सवाल उठ रहे हैं. ऐसी चर्चा है कि महापौर पद के लिए आरक्षण के बिना चुनाव पहली बार हो रहा है. इस वजह से, चुनाव के बाद महापौर पद के लिए राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.








