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नाराज नहीं, सलाह दे रहा हूं: भाजपा नेतृत्व पर मुनगंटीवार की दोटूक

– “मुख्यमंत्री पद स्थायी नहीं”, चंद्रपुर हार पर आत्ममंथन जरूरी, मुनगंटीवार–बावनकुले बयानबाज़ी तेज

मुंबई :- भले ही राज्य में भाजपा को नगरपालिका और पंचायत समिति के चुनाव में ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की हो, लेकिन भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार का गढ़ माने जानेवाले चंद्रपुर में ११ में से ८ स्थानों पर कांग्रेस के नगराध्यक्ष चुने गए हैं। वहीं भाजपा को केवल दो सीटें ही मिल सकी हैं। इस हार के बाद सुधीर मुनगंटीवार ने सीधे तौर पर पार्टी नेतृत्व पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस ने अपने नेताओं को ताकत दी, जबकि हमारी पार्टी ने मेरी ताकत कम कर दी। इसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि सुधीर मुनगंटीवार के मन की नाराजगी बाहर आ गई है। इस पर भाजपा नेताओं की भी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

अब एक बार फिर सुधीर मुनगंटीवार ने अपनी स्पष्ट राय रखी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद स्थायी नहीं होता, वह भी आता है और जाता है। विदर्भ की १०० नगरपरिषदों और नगरपंचायतों में से ५५ स्थानों पर भाजपा के नगराध्यक्ष चुने गए हैं। मुख्यमंत्री के गृहनगर नागपुर में २७ में से २२ नगरपालिकाओं पर भाजपा ने जीत दर्ज की है। हालांकि, चंद्रपुर में भाजपा को केवल दो स्थानों पर ही सफलता मिल पाई। इसके बाद मुनगंटीवार ने अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले के बयान पर मुनगंटीवार ने अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि मैं नाराज नहीं हूं, लेकिन सही समय पर सही सलाह देना एक निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में मेरी जिम्मेदारी है। कार्यकर्ताओं की आवाज बनना भी मेरी जिम्मेदारी है और मैं उसे पूरी निष्ठा से निभा रहा हूं। पार्टी ने जब-जब मुझे शक्ति दी, तब-तब मैंने अपने काम के माध्यम से पार्टी की प्रतिष्ठा बढ़ाने का प्रयास किया। मंत्री पद नहीं मिला इसलिए मैं नाराज क्यों होऊं? नाराजगी तो जनता में है। मंत्री पद आता-जाता रहता है, मुख्यमंत्री पद भी जिसका है, वह भी आएगा और जाएगा। कोई भी स्थायी नहीं है।

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