– करोड़ों खर्च के बावजूद बदहाल भवन, संरचनात्मक ऑडिट नहीं कराने का आरोप
– सीईओ कार्यालय के सामने पीओपी क्षतिग्रस्त, आधी रात को टली बड़ी अनहोनी
नागपुर :- जिला परिषद की इमारत हेरिटेज होकर पत्थर से बनी है. एक साल पहले प्रशासक राज आने के बाद निर्माण विभाग ने इस इमारत पर करोड़ों रुपये खर्च किए थे. अब सीईओ कार्यालय के सामने वाले हिस्से में बने पीओपी (पत्थर की छत) के एक हिस्से को फिर से नुकसान पहुंचा है, इसलिए प्रशासन को इसे पूरी तरह से हटाने की जरूरत है. छह महीनों में यह तीसरी घटना है और ऐसी घटनाएं इसलिए हो रही हैं क्योंकिनिर्माण विभाग ने इस इमारत का संरचनात्मक ऑडिट नहीं कराया है.
तीन दिन पहले, लगभग आधी रात को, सीईओ के कार्यालय के सामने लगे पीओपी में दरार पाई गई. इसके टुकड़े जगह-जगह से गिर रहे थे. इस वजह से पूरे पीओपी ढांचे को हटाना पड़ा. इससे पहले, आबासाहेब खेडकर सभागृह की छत पर लगा पीओपी गिर गया था. उससे पहले, गेट पर लगा पीओपी भी गिर चुका था. अब, सीईओ के कार्यालय के सामने लगा हुआ पीओपी क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण उसे हटाना पड़ा.
तीन साल पहले, नई इमारत में लघु सिंचाई विभाग की बिजली की वायरिंग जल गई थी. नई इमारत हेरिटेज शैली में बनाई गयी थी. इमारत का उद्घाटन 2०12 में हुआ था, जब तत्कालीन सीईओ अमित सैनी थे. तत्कालीन सीईओ तुकाराम मुंडे ने 2००8 में इमारत की नींव रखी थी.
निर्माण विभाग की लापरवाही उजागर
उस समय इमारत के निर्माण को लेकर कुछ सवाल उठे थे. 13 वर्षों में इमारत की खराब हालत ने एक बड़ी समस्या खड़ी कर दी है. गौरतलब है कि हाल ही में लाखों रुपये की लागत से इस पर पेंट कराया गया है.
हालांकि, इन घटनाओं ने आंतरिक पीओपी और अन्य संरचनाओं को कमजोर कर दिया है. इमारत के रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी निर्माण विभाग की है. इस इमारत का संरचनात्मक ऑडिट कराना और आवश्यक सुधार करना अनिवार्य है. हालांकि , इस विभाग की पूरी तरह से उपेक्षा की जा रही है.








