अमरावती :- टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता खत्म करने की मांग को लेकर आंदोलक की भूमिका में उतरे शिक्षकों को नववर्ष के पहले ही दिन बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार के आदिवासी विकास विभाग ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण सर्कुलर जारी किया है जिसमें स्पष्ट किया गया है कि जो शिक्षक वर्ष 2005 के पूर्व नियुक्त हैं और जिनके पास टीईटी पास करने का प्रमाणपत्र नहीं है, उन्हें अब टीईटी अनिवार्य रूप से पास करना होगा। वरना उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया जाएगा। इस आदेश के अनुसार, ऐसे शिक्षकों को नियुक्ति के बाद 2 वर्षों के भीतर टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक है। यदि शिक्षक इस अवधि के भीतर टीईटी पास नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें सेवा से मुक्त किया जा सकता है या उन्हें सेवानिवृत्त होने के लिए कहा जा सकता है। यदि कोई शिक्षक टीईटी पास नहीं करता, तो उसे सेवा में बने रहने का कोई अधिकार नहीं होगा, और उसे अंतिम वेतन के साथ सेवा समाप्त करनी पड़ सकती है। यह नियम शिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाने और सरकारी शिक्षण संस्थानों में मानक स्थापित करने के लिए लागू किया गया है। इस फैसले से उन शिक्षकों को कड़ी चुनौती मिलेगी, जो अब तक टीईटी में सफल नहीं हुए हैं। शिक्षा विभाग ने उनसे आग्रह किया है कि वे जल्द से जल्द टीईटी की तैयारी करें ताकि उनके कैरियर पर कोई असर न पड़े।




