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धान खरीदी पूरी, भुगतान शून्य

– गोंदिया के 52 हजार किसानों के ₹419 करोड़ अटके

– दो महीने से इंतज़ार में किसान : 17.70 लाख क्विंटल धान खरीदा, पैसा नहीं मिला

गोंदिया :- जिले में इन दिनों मार्केटिंग फेडरेशन के माध्यम से 186 केंद्रों पर 17.70 लाख धान खरीदा गया है। लेकिन 52 हजार से अधिक किसानों से 419 करोड़ रुपयों का धान खरीदने के बावजूद अब तक एक रुपए का भी भुगतान नहीं किया गया है। सरकारी धान खरीदी केंद्रों पर धान की बिक्री के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन की अवधि 31 जनवरी तक बढ़ा दी गई है। इसके अलावा दो बार धान खरीदी का लक्ष्य भी बढ़ाया जा चुका है। जिसके कारण लगातार खरीदी का काम जारी है। अब तक पंजीकृत 1,28,638 किसानों में से 52,035 किसानों से खरीदी की गई है। लेकिन उनके भुगतान के 419 करोड़ अटक गए हैं। इस कारण रबी की फसल के लिए अन्य स्रोतों से किसानों को रुपयों का जुगाड़ करना पड़ रहा है। इस वर्ष शीतकालीन अधिवेशन के दौरान धान उत्पादक किसानों को बोनस दिए जाने संबंधी कोई घोषणा नहीं की गई है। जिला मार्केटिंग अधिकारी विवेक इंगले ने कहा कि निधि नहीं होने के कारण किसानों को भुगतान नहीं किया गया। शासन से निधि प्राप्त होते ही किसानों के खाते में डाली जाएगी।मार्केटिंग फेडरेशन के माध्यम से जिले के 186 खरीदी केंद्रों पर अब तक 17.70 लाख क्विंटल धान की खरीदी पूरी हो चुकी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि दो माह बीत जाने के बावजूद किसानों को एक रुपए का भी भुगतान नहीं मिला है।

इस देरी के चलते जिले के 52 हजार से अधिक किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। खरीदे गए धान की कुल कीमत करीब 419 करोड़ रुपए बताई जा रही है, जो अब तक किसानों के खातों में जमा नहीं की गई है। भुगतान न मिलने से किसानों को खेती से जुड़े कर्ज, बीज-खाद की बकाया राशि और घरेलू जरूरतें पूरी करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

धान का भुगतान न मिलने से किसानों पर बढ़ा आर्थिक बोझ

किसानों का कहना है कि शासन द्वारा समय पर भुगतान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक सिर्फ तारीख पर तारीख मिल रही है। कई किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। इधर संबंधित विभाग का कहना है कि भुगतान प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही किसानों के खातों में राशि जमा की जाएगी। हालांकि, किसानों के लिए राहत की यह बात कब हकीकत बनेगी, इस पर अभी संशय बना हुआ है।


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