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मतदान का अधिकार खतरे में : सुलभ ई-बस सेवा पर हाई कोर्ट सख्त

– दिव्यांगों के लिए ई-बसें तैयार, लेकिन प्रशिक्षण के अभाव में सड़कों से दूर

– नागपुर में ई-बसें खड़ी, चालक-परिचालकों को अब तक प्रशिक्षण नहीं

नागपुर :- मनपा द्वारा विकलांगों के लिए व्हीलचेयर – सुलभपीएम ई-बस सेवा शीघ्र शुरू किए जाने की घोषणा के बावजूद चालक और परिचालकों को अब तक आवश्यक प्रशिक्षण न मिलने के कारण सेवा शुरू नहीं हो पाई है। इस संबंध में बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने मनपा से सवाल करते हुए 12 जनवरी तक विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अंधारे द्वारा दायर की गई है, जिसमें मांग की गई है कि मतदान से पहले इन ई-बसों को यात्रियों के लिए शुरू किया जाए। मामले पर शुक्रवार को न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। याचिका के अनुसार, नागपुर महानगरपालिका के पास ऐसी अत्याधुनिक ई-बसें उपलब्ध हैं जिनमें हाइड्रोलिक लिफ्ट लगी हुई है, जिससे व्हीलचेयर पर निर्भर व्यक्ति आसानी से सफर कर सकते हैं। हालांकि, प्रशासन ने आचार संहिता का हवाला देते हुए इन बसों को अब तक सड़कों पर नहीं उतारा है। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया था कि यदि दिव्यांगों को सुलभपरिवहन नहीं मिला, तो वे मतदान करने से वंचित हो जाएंगे, जो उनके मौलिक अधिकारों तथा लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन होगा। शुक्रवार को सुनवाई में मनपा ने बताया कि मेसर्स जेबीएम कंपनी की कुल 150 ई-बसें प्रस्तावित हैं, जिनमें से 30 बसें नागपुर पहुंच चुकी हैं।

हाई कोर्ट की मनपा को चेतावनी

मनपा ने अदालत को बताया कि 30 बसों का पंजीकरण 18 दिसंबर को क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में भी हो चुका है। हालांकि, प्रशिक्षण न होने के कारण बसों का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। इस पर उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि मनपा प्रशिक्षण से संबंधित जानकारी प्रस्तुत करे, अन्यथा संबंधित कंपनी को सीधे नोटिस जारी किया जाएगा।

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