चंद्रपूर :- पुलिस महकमे में ईमानदारी की कसमें खाने वाली ‘खाकी’ एक बार फिर शर्मसार हुई है। सरकारी संपत्ति की रक्षा करने वाले रक्षक ही भक्षक बन बैठे हैं। येह मामला एक थानेदार से जुड़ा है, जिन्होंने थाने के मालखाने में रखे जब्त लोहे के कबाड़ को अवैध रूप से बेचकर सरकारी तिजोरी को भारी चूना लगाया है।
सूत्रों के अनुसार, थानेदार ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए थाने में विभिन्न मामलों के तहत जब्त किए गए लोहे के कबाड़ और अन्य सामानों को गुपचुप तरीके से एप्रिल महिने में ठिकाने लगा दिया। इस ‘काले खेल’ से जमा हुई मोटी रकम का इस्तेमाल निजी संपत्ति खड़ी करने में किया गया। चर्चा है कि वर्दी की धमक के आगे मातहत कर्मचारी भी चुप्पी साधे रहे, लेकिन भ्रष्टाचार की यह गूंज आखिरकार उच्चाधिकारियों के कानों तक पहुंच ही गई।
कहा जाता है कि गुनाह कितना भी शातिर क्यों न हो, पीछे निशान छोड़ ही जाता है। इस मामले में भी विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी और दोषी पाए जाने पर थानेदार के खिलाफ सख्त कानूनी व अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।








