– गलत डिजाइन की भारी कीमत: कावरापेठ–जुना कामठी रोड फ्लाईओवर बना मुसीबत
– समन्वयहीन विकास का नमूना बने रेलवे फ्लाईओवर, रोजमर्रा हो रहीं दुर्घटनाएं
– जांच हो, जुर्माना वसूला जाए और नया फ्लाईओवर बने : एनसीपी की सरकार से मांग
नागपुर :- एक बार फिर यह बात स्पष्ट हो गई है कि शहर में रेलवे फ्लाईओवरों और सबवे के बड़े पैमाने पर निर्माण से यातायात की समस्या कम होने के बजाय और बढ़ रही है. योजना की कमी, गलत डिजाइन और दोषपूर्ण निर्माण के कारण लोक निर्माण विभाग को करोड़ों की लागत से निर्मित कावरापेठ से जुना कामठी रोड रेलवे फ्लाईओवर को यातायात के लिए बंद करना पड़ा है. देश के चारों दिशाओं में जाने वाले महत्वपूर्ण रेलवे मार्ग शहर से होकर गुजरते हैं. इसलिए, शहर में विभिन्न एजेंसियों द्वारा रेलवे फ्लाईओवरों और सबवे पर काम चल रहा है. हालांकि, लोक निर्माण विभाग, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, मेट्रो और महारेल के बीच समन्वय की कमी है. शांतिनगर से राजीव गांधीनगर और कावरापेठ से जुना कामठी रोड तक के दो रेलवे फ्लाईओवरों का डिजाइन गलत निकला है. इस गलत डिजाइन के कारण करोड़ों रुपये की लागत से बने एक फ्लाईओवर को बंद करना पड़ा है. फिलहाल, फ्लाईओवर केकुछ हिस्सों से अपर्याप्त उपायों के साथ यातायात शुरू कर दिया गया है. कावरापेठ से जुना कामठी रोड तक का रेलवे फ्लाईओवर कलमना लाइन से शुरू होता है, दो रेलवे लाइनों को पार करता है और फिर तीन दिशाओं में बंट जाता है. इस पुल को शांतिनगर-राजीव गांधीनगर और कावरापेठ के मौजूदा फ्लाईओवरों से जोड़ा गया है. हालांकि, इस पुल पर अलग से लैंडिंग की सुविधा न होने के कारण इसे यातायात के लिए नहीं खोला जा सका है. परिणामस्वरूप, पुराने कामठी रोड से आने वाले यातायात को शांतिनगर से राजीव गांधीनगर फ्लाईओवर की ओर मोड़ दिया गया है. इस वजह से इस इलाके में लगातार ट्रैफिक जाम रहता है और ड्राइवरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। दुर्घटनाएं रोजमर्रा की बात हो गई हैं.
यहां एक ‘टी-पॉइंट’ बन गया है, क्योंकि शांतिनगर घाट से जुनी कामठी की ओर जाने वाले वाहन और राजीव गांधी नगर से आने वाले वाहन एक ही जगह पर आकर मिलते हैं. सडक़ की अपर्याप्त चौड़ाई, डिवाइडर से उत्पन्न समस्या और यू-टर्न की सुविधा न होने के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है.
कावरापेठ से जुनी कामठी मार्ग पर तीन रेलवे ट्रैक होने के कारण वाहनों को रेलवे क्रॉसिंग पर घंटों इंतजार करना पड़ता था. इस समस्या के समाधान के लिए लोक निर्माण विभाग ने लगभग एक किलोमीटर लंबा यह जटिल रेलवे फ्लाईओवर बनवाया. इस परियोजना के लिए प्रशासनिक मंजूरी 18० करोड़ रुपये में दी गई थी, जबकि वास्तविक लागत 141.62 करोड़ रुपये रही है.
कलमना-राजीवनगर रेलवे फ्लाईओवर का कायादेश सितंबर 2०21 में दिया गया था. काम सितंबर 2०24 में पूरा होना था. हालांकि, गलत डिजाइन के कारण यह फ्लाईओवर अपने उद्देश्य को पूरा करने में विफल रहा है, जिससे नागपुर निवासियों की यातायात समस्या और बढ़ गई है. इससे पहले, इस फ्लाईओवर के कारण संविधान चौक से इंदोरा चौक को जोडऩे वाली सडक़ को बंद करना पड़ा था. इसके अलावा, मानकापुर रेलवे अंडरपास और वर्धमानगर में बारिश का पानी अंडरपास में घुसने और यातायात बाधित होने की घटनाएं सामने आई हैं. मानकापुर और मंगलवारी रेलवे फ्लाईओवर में भी दोषपूर्ण निर्माण के कारण समस्याएं बढ़ी हैं.
हर के कुछ फ्लाईओवर अनियोजित विकास का उदाहरण हैं. इस बात की जांच होनी चाहिए कि गलत डिजाइन को कैसे मंजूरी दी गई और सरकार के पास विशेषज्ञ इंजीनियर और सलाहकार होने के बावजूद इस फ्लाईओवर का निर्माण कैसे हुआ. साथ ही, संबंधित लोगों से जुर्माना वसूलने के बाद एक नया फ्लाईओवर बनाया जाना चाहिए, ऐसी मांग एनसीपी (शरद पवार) के शहर अध्यक्ष दुनेश्वर पेठे ने की है.
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