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इस राज्य में आज से सड़कों से गायब रहेंगे बस

महाराष्ट्र के करोड़ों यात्रियों और छात्रों के लिए आज का दिन मुश्किलों भरा हो सकता है। ई-चालान और पार्किंग नियमों के खिलाफ ट्रांसपोर्टरों ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। मुंबई के आजाद मैदान से शुरू होने वाला यह आंदोलन पूरे राज्य के परिवहन तंत्र को ठप करने की ताकत रखता है। ट्रांसपोर्टरों की नाराजगी का सबसे बड़ा कारण ई-चालान व्यवस्था है। वित्तीय उत्पीड़न का आरोप: संगठन के सदस्य मलकीत सिंह बाल का कहना है कि एक ही गलती के लिए दिन में कई बार चालान काटे जा रहे हैं। नो-पार्किंग का खेल: ट्रांसपोर्टरों का तर्क है कि जब सरकार ने पर्याप्त पार्किंग और कार्गो जोन बनाए ही नहीं, तो ‘नो-पार्किंग’ के नाम पर भारी जुर्माना वसूलना गलत है।

दूध, सब्जी और फलों की सप्लाई चेन टूटने से कीमतें आसमान छू सकती हैं। पेट्रोल-डीजल के टैंकर रुकने से पंपों पर लंबी कतारें दिख सकती हैं। बोर्ड परीक्षार्थियों को केंद्रों तक पहुंचने में भारी किल्लत का सामना करना पड़ेगा।

अनुचित ई-चालानों को तुरंत रद्द किया जाए। अदालती सुनवाई के लिए 50% राशि जमा करने का नियम खत्म हो। जब तक पार्किंग स्थल न बनें, ‘नो-पार्किंग’ जुर्माना बंद हो। बॉर्डर चेकपोस्ट को पूरी तरह समाप्त किया जाए।

परिवहन विवादों के समाधान के लिए अलग ‘ट्रिब्यूनल’ बने। परिवहन मंत्री प्रताप सरणाईक ने कहा कि सरकार सकारात्मक है और 6 मार्च तक कुछ अधिसूचनाएं जारी कर सकती है। हालांकि ट्रांसपोर्टर अब मौखिक वादों के बजाय सरकारी रेजोल्यूशन (GR) पर हस्ताक्षर चाहते हैं। जब तक लिखित आदेश नहीं मिलता, पहिये नहीं घूमेंगे।

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