– उद्यमियों को मानव संसाधन से जुड़ी गंभीर समस्याओं का करना पड़ रहा सामना
नागपुर :- गैस की कमी और कच्चे माल के आयात में कठिनाइयों ने उद्यमियों के लिए श्रमशक्तिकी गंभीर समस्या खड़ी कर दी है. सूत्रों केअनुसार, ‘एमआईडीसी’ क्षेत्र में लगभग 3० प्रतिशत श्रमिकों ने अपनी नौकरी छोड़ दी है.
शहर के पास के हिंगना, बुटीबोरी और पिविली नदी क्षेत्रों में महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) क्षेत्र विकसित किया गया है. महिंद्रा जैसी ऑटोमोबाइल कंपनियां यहां स्थित हैं. नागरिक रोजगार की तलाश में शहरों में आकर बस गए हैं. अधिकांश प्रवासी श्रमिक दिहाड़ी मजदूरी करके अपना जीवन यापन करते हैं. निवास प्रमाण पत्र न होने के कारण कई लोगों को गैस सिलेंडर कनेक्शन नहीं मिल पाता है.
अब तक वे अवैध रूप से 5-7 किलो के सिलेंडर भर रहे थे. हालांकि, ईरान में युद्ध के कारण गैस आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो गई है. सिलेंडर लेने के लिए एजेंसी के बाहर लंबी कतारें लगी हैं. सिलेंडर केवल पंजीकृत लोगों को ही दिए जा रहे हैं. हालांकि, जो लोग पंजीकृत नहीं हैं, उन्हें सिलेंडर नहीं मिल सकते.
एक समस्या खड़ी हो गई है. अवैध रूप से गैस सिलेंडर भरने वालों ने कीमतें बढ़ा दी हैं. उपभोक्ताओं को पहले एक किलो गैस के लिए 1०0 रुपये देने पड़ते थे, अब उन्हें 5०० रुपये देने पड़ रहे हैं. कुछ जगहों पर तो पैसे देने के बाद भी गैस नहीं मिल रही है. परिणामस्वरूप, उपभोक्ताओं को पेट्रोल के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. दूसरी ओर, व्यावसायिक उपयोग के लिए गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बंद हो गई है. इसके चलते होटल मालिकों और खाद्य विक्रेताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, उनके कई स्टॉल बंद हो गए हैं. जो होटल खुले हैं, उन्होंने कीमतें बढ़ा दी हैं. इस वजह से, श्रमिक होटल में खाना भी नहीं खा पा रहे हैं, इसलिए कई लोग गांवों की ओर रुख कर रहे हैं. कई श्रमिक शहर छोडक़र उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में चले गए हैं. इसके चलते कंपनियों में कर्मचारियों की कमी हो गई है.








