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स्कूलों का कॉमन शेड्यूल 11 अप्रैल से

– परीक्षा के बाद जनगणना की ड्यूटी

 नागपुर :-1० वीं व 12 वीं बोर्ड की परीक्षाएं होने के बाद स्कूलों में प्राथमिक और माध्यमिक व उच्च माध्यमिक की परीक्षाएं होंगी. परीक्षा केलिए शिक्षा विभाग ने कॉमन शेड्यूल जारी किया है. इसके तहत परीक्षाएं 11 से 22 अप्रैल तक ली जाएंगी जबकि परिणाम 1 मई को घोषित किया जाएगा. भीषण गर्मी में छात्रों की परीक्षा परेशानी तो बनेगी ही, लेकिन असली परीक्षा शिक्षकों को देनी होगी.

16 मई से 16 जून तक जनगणना की ड्यूटी होने से इस बार शिक्षकों को गर्मी की छुट्टियों का आनंद नहीं मिल सकेगा. पिछले दो वर्ष से शिक्षा विभाग द्वारा परीक्षा का कॉमन शेड्यूल जारी किया जा रहा है. हालांकि इसका विरोध भी किया गया, लेकिन विभाग ने इसे इस वर्ष भी जारी रखा है. इसके तहत पहली से 8वीं तक की संकलित मूल्यमापन परीक्षा 11 से 22 अप्रैल तक ली जाएगी.

वहीं मराठी, गणित और अंग्रेजी विषय के पेपर विभाग द्वारा उपलब्ध कराए जाएंगे. 5वीं व 8वीं की वार्षिक परीक्षा में अब छात्रों को उत्तीर्ण करना अनिवार्य नहीं है. यानी अब छात्र अपने प्रदर्शन के आधार पर अनुत्तीर्ण या उत्तीर्ण होंगे.

भीषण गर्मी में परीक्षा को लेकर शिक्षकों सहित अभिभावकों का भी विरोध है. शिक्षकों का कहना है कि अप्रैल के पहले सप्ताह में परीक्षाएं निपट जानी चाहिए. अंतिम सप्ताह तक तापमान और बढ़ता है. करीब 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. इस हालत में विद्यार्थियों की मुसीबत बढऩी तय है.

शिक्षक भारती के महामंत्री प्रा. सपन नेहरोत्रा ने बताया कि कक्षा पहली से 9वीं और 11वीं की परीक्षाओं पर स्कूलों के अधिकार को राज्य सरकार द्वारा छीनना शिक्षक मान्य नहीं है. स्कूल अपनी आंतरिकपरीक्षाओं का समय सारिणी और आयोजन अपने अनुसार करते हैं. इससे शिक्षकों को शैक्षणिक और अशैक्षणिक दोनों प्रकार के कार्य दिए जाते हैं, जिससे पाठ्यक्रम पूरा करने में समस्याएं आती हैं.

इसलिए स्कूलों को अपनी आंतरिक परीक्षाओं का अधिकार अबाधित रहना चाहिए. वहीं आंबेडकर-फुले शिक्षक संगठन के अध्यक्ष प्रा. जयंत जांभुलकर ने बताया कि परीक्षा के लिए एक समान तिथि का निर्णय स्कूलों पर अविश्वास का प्रतीक है. उनके अनुसार मुख्याध्यापक, शिक्षक और स्कूल का महत्व बनाए रखना आवश्यक है और आंतरिक परीक्षाओं पर नियंत्रण से यह महत्व कम नहीं होना चाहिए.

शिक्षकों ने सुझाव दिया कि स्कूलों को अपनी आंतरिक परीक्षा आयोजित करने और परिणाम घोषित करने की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए. राज्य सरकार केवल मार्गदर्शन प्रदान करे, लेकिन स्कूलों की स्वायत्तता में दखल न दे.

भीषण गर्मी निकालेगी दम

परीक्षाएं निर्धारित समय पर लेकर 1 मई को परिणाम घोषित करना है. इसके बाद 16 मई से शिक्षकों-कर्मचारियों की जनगणना ड्यूटी रहेगी. इस संबंध में स्कूलों को आदेश भी प्राप्त हो गये हैं. कुछ स्कूलों में सभी शिक्षकों-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है. इस हालत में स्कूलों का प्रशासकीय कामकाज प्रभावित होना तय है. ड्यूटी से पहले अप्रैल के अंतिम सप्ताह में प्रशिक्षण लिया जाएगा. अब परिणाम तैयार करें या फिर प्रशिक्षण में शामिल हों, यह सवाल अभी से खड़ा हो गया है. भीषण गर्मी में जनगणना होने से शिक्षकों में अभी से नाराजगी दिखाई दे रही है. 16 जून तक जनगणना के पश्चात एक सप्ताह बाद नया शैक्षणिक सत्र आरंभ हो जाएगा. यानी शिक्षकों की गर्मियों की छुट्टियों पर शिक्षा विभाग ने डाका डाल दिया है.

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