सावंगी घाट से बिना रॉयल्टी के रेत परिवहन जारी, संबंधित विभाग की अनदेखी

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यासीन शेख, गोंदिया :- सड़क अर्जुनी तालुका में रेत घाटों की संख्या काफी अधिक है। इनमें सौंदड़, सावंगी-1 और सावंगी-2 घाटों का विधिवत लिलाव किया गया है। लिलाव के बाद नदी घाटों से निकाली गई रेत को सौंदड़ में वाळू (रेत) डिपो बनाकर संग्रहित किया गया है। नियमानुसार इसी डिपो से रेत की बिक्री होना अनिवार्य है।

इसके बावजूद सावंगी क्षेत्र में डंप की गई रेत का बिना रॉयल्टी परिवहन और बिक्री खुलेआम जारी है। सूत्रों के अनुसार, एक रॉयल्टी पर्ची पर कम से कम 4 से 5 डब्ल्यूआर ट्रिप रेत की अवैध ढुलाई की जा रही है। इस पूरे मामले में संबंधित विभाग और राजस्व अधिकारियों द्वारा अनदेखी की जा रही है, जिससे शासन को लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

सड़क अर्जुनी तालुका के सावंगी नदी घाट के पास बड़ी मात्रा में रेत का अवैध भंडारण किया गया है। यहां से बिना रॉयल्टी रेत की बिक्री कर विभिन्न निर्माण कार्यों में सप्लाई की जा रही है। यह सब खुलेआम होने के बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं।

घरकुल लाभार्थी रेत के इंतजार में

सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत आम नागरिकों को घरकुल (आवास) मंजूर किए गए हैं। लेकिन इन घरों के निर्माण के लिए आवश्यक रेत उपलब्ध नहीं हो पा रही है। लाभार्थियों को कम से कम 5 ब्रास रेत उपलब्ध कराना जरूरी है, लेकिन रेत घाटों की उपलब्धता के बावजूद लोग रेत के लिए इंतजार कर रहे हैं।

“कुंपणच खातोय शेत” जैसी स्थिति

रेत चोरी रोकने और राजस्व की सुरक्षा के लिए तलाठी, मंडल अधिकारी और अन्य कर्मचारियों की टीम बनाई गई थी। लेकिन अब यही टीम और संबंधित अधिकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने में संलिप्त होने के आरोपों में घिरते नजर आ रहे हैं।

“तेरी भी चुप, मेरी भी चुप” जैसी स्थिति बन गई है। अगर रखवाले ही नुकसान करने लगें, तो जिम्मेदारी किसकी तय की जाए—यह बड़ा सवाल बन गया है। अधिकारियों की मिलीभगत से तालुका में अवैध रेत परिवहन को बढ़ावा मिल रहा है।

रॉयल्टी दिखाकर टिपर और डंपर वाहनों से बड़े पैमाने पर अवैध रेत परिवहन किया जा रहा है। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर अवैध तस्करी पर तुरंत रोक लगाने की मांग नागरिकों द्वारा की जा रही है।