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HC से साईबाबा हाउसिंग सोसाइटी को मिली राहत

– 51 प्लॉट्स से हटा भूमि आरक्षण

नागपुर :- वाठोडा स्थित खसरा नंबर 53, सिटी सर्वे नंबर 171 में स्थित 8.65 एकड़ जमीन सोसाइटी के सदस्यों ने खरीदी थी. 10 सितंबर 2001 को लागू हुई शहर की अंतिम विकास योजना (डेवलपमेंट प्लान) के तहत इस जमीन को 12 मीटर चौड़ी सड़क, कम्युनिटी सेंटर और पार्क के लिए आरक्षित कर दिया गया था. हालाकि 20 से अधिक वर्षों का समय बीत जाने के बावजूद प्रन्यास ने इस आरक्षण के तहत जमीन का अधिग्रहण करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया. इस अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया जिस पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने साईंबाबा नियोजित को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी (शिवाजीनगर सहकारी भाडेकरू मालकी गृह निर्माण सोसाइटी लिमिटेड के प्लॉट धारकों और सदस्यों का संघ) को बड़ी राहत प्रदान की. अदालत ने मौजा वाठोडा स्थित 8.65 एकड़ जमीन पर बने 51 प्लॉटों पर से सड़क, सामुदायिक केंद्र (कम्युनिटी सेंटर) और पार्क के लिए किए गए आरक्षण को रद्द घोषित कर दिया है.

सुनवाई के दौरान प्रन्यास की ओर से दलील दी गई कि सोसाइटी द्वारा दिया गया खरीद नोटिस दोषपूर्ण था क्योंकि उसमें जमीन की माप शीट (मेजरमेंट शीट) और अन्य जरूरी दस्तावेज संलग्न नहीं किए गए थे जिस पर हाई कोर्ट ने ‘याकूब सालेभाई कांट्रेक्टर बनाम महाराष्ट्र राज्य’ मामले में दिए गए हालिया फैसले का हवाला दिया. अदालत ने स्पष्ट किया कि 24 महीने की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद, यदि जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाता है तो संबंधित प्राधिकरण यह बहाना नहीं बना सकता कि नोटिस दोषपूर्ण था या उसमें शीर्षक से जुड़े दस्तावेज नहीं थे.

एमआरटीपी अधिनियम, 1966 की धारा 127 (1) के तहत वाठोडा के 51 प्लॉटों पर किया गया. आरक्षण अब लैप्स हो चुका है. प्रतिवादियों को इस फैसले की प्रति मिलने के 8 सप्ताह के भीतर आधिकारिक राजपत्र (ऑफिशियल गैजेट) में आरक्षण खत्म होने की अधिसूचना प्रकाशित करनी होगी. अब प्लॉट धारक अपनी जमीन का विकास करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र है, जैसा कि विकास योजना के तहत आसपास की जमीनों के लिए अनुमत है. यह फैसला उन तमाम प्लॉट धारकों के लिए एक नजीर बन सकता है जिनकी जमीनें सालों से बिना किसी अधिग्रहण के सरकारी आरक्षण के जाल में फंसी हुई हैं.

सोसाइटी ने जारी किया था खरीद नोटिस : अधिग्रहण न होने पर याचिकाकर्ताओं ने 21 फरवरी 2023 को महाराष्ट्र क्षेत्रीय और नगर नियोजन अधिनियम की धारा 127 के तहत प्रन्यास और अन्य संबंधित अधिकारियों को एक ‘खरीद नोटिस’ जारी किया. यह नोटिस एनआईटी को 22 फरवरी 2023 को प्राप्त हुआ था. नियम के अनुसार नोटिस मिलने के 24 महीने के भीतर (यानी 22 फरवरी 2025 तक) अधिकारियों को जमीन का अधिग्रहण करना था लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.


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