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मनोहर पर पहली शिकायत दर्ज; क्या अब सलाखों के पीछे जाएंगे मनोहर?

नागपुर :- शहर में कथित भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां मनोहर नामक व्यक्ति के खिलाफ पहली आधिकारिक शिकायत दर्ज होने के बाद पूरे क्षेत्र में हलचल मच गई है और कहा जा रहा है कि मनोहर किसी मंत्री के करीबी होने का फायदा उठाकर पीड़ित को दबाने की कोशिश कर रहा था, परंतु मामला बिगड़ता देख अब मंत्री जी भी इससे पल्ला झटकते नजर आ रहे हैं। चर्चा है कि इस मामले में अब कोई बड़ा राजनेता सामने आने से कतरा रहा है, क्योंकि बात अब बहुत दूर तक पहुंच चुकी है। इसके चलते पीड़ित को न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है और जल्द ही इस मामले में और भी ठेकेदारों के सामने आने की संभावना व्यक्त की जा रही है। वहीं बड़े-बड़े राजनेता, जिनके नाम पर मनोहर लोगों को धौंस दिखाता था, अब शिकायत के बाद उससे दूरी बनाते नजर आ रहे हैं।

अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या मनोहर को कानून के शिकंजे में लेकर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। सूत्रों के अनुसार, पीड़ित ठेकेदार ने अपनी आपबीती में बताया कि कुछ वर्ष पहले मनोहर ने उसे टेंडर दिलाने का लालच दिया था। उस समय काम-धंधा न होने के कारण वह उसकी बातों में आ गया, जिसके बाद मनोहर ने 10% कमीशन के हिसाब से लगभग 3 लाख रुपये की मांग की, जिसमें से पीड़ित ने 1 लाख रुपये अपनी शादी से पहले और 2 लाख रुपये एक उपाध्यक्ष के बंगले में जाकर दिए, लेकिन इसके बावजूद उसे न तो कोई काम मिला और न ही पैसे वापस किए गए। इसके बाद पीड़ित ठेकेदार ने लगातार फोन कॉल, मुलाकात और व्हाट्सएप संदेशों के माध्यम से मनोहर से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन हर बार उसे नजरअंदाज किया गया। हताश होकर वह कई बार उसके घर भी गया और अपने पैसे या काम दिलाने की गुहार लगाता रहा, परंतु मनोहर ने उसे लगातार टालते हुए अनदेखा किया। मामला तब और गंभीर हो गया जब पीड़ित ने अपनी शिकायत राज्य के एक बड़े मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाई, जहां से केवल “will check” जैसा जवाब मिला, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। समय बीतता गया और पीड़ित को न काम मिला और न ही पैसे लौटाए गए। अंततः मजबूर होकर उसने पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई और उसे न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा जताया। हालांकि, शिकायत दर्ज होने के कुछ ही मिनटों में पीड़ित ठेकेदार के पास लगातार फोन आने लगे कि उसने शिकायत क्यों की और मनोहर पैसे लौटाने को तैयार है। बताया जा रहा है कि मनोहर ने कई माध्यमों से पैसे वापस भेजने की कोशिश भी की ताकि मामला दबाया जा सके, लेकिन पीड़ित ने पैसे लेने से साफ इंकार करते हुए कहा कि वह सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि लगभग 100 से 300 अन्य लोगों के लिए भी लड़ रहा है, जो इसी तरह का शिकार हुए हैं, और वह दोषी को जेल भिजवाकर ही रहेगा।

जैसे ही यह मामला सामने आया, यह आग की तरह फैल गया और मनोहर और पीड़ित एक ही समाज से होने के चलते समाज के कुछ लोगों द्वारा पीड़ित पर दबाव बनाया जाने लगा कि मनोहर अपने ही समाज का है और इससे समाज की बदनामी होगी। जिस पर पीड़ित ने स्पष्ट जवाब दिया कि जब मनोहर ने अपने ही समाज के 60 -80 % लोगों से टेंडर और नौकरी के नाम पर करोड़ों रुपये लिए, तब समाज की याद क्यों नहीं आई, और अब जब शिकायत दर्ज कराई गई है तो समाज की याद आने लगी है। वहीं अब जानकारी मिल रही है कि मनोहर अन्य ठेकेदारों को भी कॉल कर पैसे लौटाने की कोशिश कर रहा है, जिससे कुछ लोगों को राहत मिली है और उन्होंने पीड़ित का धन्यवाद भी किया है, जबकि एक बड़ा वर्ग अब मनोहर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की तैयारी में है और माना जा रहा है कि आने वाले समय में कई और शिकायतें सामने आ सकती हैं। ऐसे में अब सबकी नजर पुलिस की जांच और कार्रवाई पर टिकी हुई है कि क्या इस मामले में सच्चाई सामने आएगी और क्या मनोहर वास्तव में कानून के शिकंजे में आकर सलाखों के पीछे जाएगा।

मुख्यमंत्री से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप की गुहार; क्या किसी मंत्री से नजदीकी कानून से ऊपर?

शिकायत दर्ज होते ही शहर में एक नई चर्चा तेज हो गई है कि मनोहर किसी बड़े मंत्री का करीबी है, जिसके चलते उसे बचाने के लिए साम, दाम, दंड, भेद तक अपनाए जा सकते हैं। लेकिन इस बार माहौल अलग दिखाई दे रहा है। सूत्रों और स्थानीय लोगों के बीच साफ चर्चा है कि अब मामला दबने वाला नहीं है और मनोहर का पर्दाफाश होकर रहेगा। लोगों का कहना है कि वर्षों से दबे मामलों को अब आवाज मिल रही है और कई पीड़ित सामने आने की तैयारी में हैं। सबसे अहम बात यह है कि जनता आज भी राज्य की न्याय व्यवस्था पर भरोसा जता रही है, खासकर मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री की कार्यशैली पर, जिन्होंने पूर्व में भी नियमों के अनुसार सख्त फैसले लेते हुए अपने ही पक्ष के लोगों पर कार्रवाई करने में कोई हिचक नहीं दिखाई। यही वजह है कि अब लोगों को उम्मीद है कि इस मामले में भी बिना किसी दबाव के निष्पक्ष जांच होगी और दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। चर्चा यह भी है कि अगर आरोप सही साबित होते हैं तो इस बार “सेटिंग” नहीं, बल्कि सीधी कड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है। अब नजरें पुलिस और प्रशासन की अगली चाल पर टिकी हैं—क्या मनोहर को बचाया जाएगा या फिर कानून का डंडा चलेगा?

– समाज का कार्ड या सच्चाई से भागना?

पीड़ित ठेकेदार और मनोहर एक ही समाज से होने के चलते अब मामला सामाजिक दबाव की ओर “समाज का कार्ड” खेलते हुए नजर आ रहा है। जानकारी के अनुसार, समाज के कुछ लोग मनोहर के पक्ष में खड़े होकर पीड़ित को समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि मनोहर अपने ही समाज का है, इससे समाज की छवि खराब हो रही है। लेकिन इस पर पीड़ित का रुख साफ और सख्त है। पीड़ित ने तीखा जवाब देते हुए कहा है कि जब मनोहर ने इसी समाज के सैकड़ों लोगों से टेंडर और नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लिए, तब उसे समाज की गरिमा याद क्यों नहीं आई? जब मनोहर को पैसे देने के लिए लोगों ने अपनी जमीन (खेत) गिरवी रखी, सोना गिरवी रखा या कर्ज लेकर रकम जुटाई, तब समाज की याद क्यों नहीं आई—तब समाज कहां था? आरोप है कि मनोहर ने अपने ही समाज के लोगों की मेहनत की कमाई से करोड़ों-अरबों की संपत्ति खड़ी की, लेकिन उस समय किसी ने समाज की बदनामी की बात नहीं उठाई, और तब मनोहर को समाज की याद क्यों नहीं आई? पीड़ित का कहना है कि अब जब सच्चाई सामने आ रही है और शिकायत दर्ज हो चुकी है, तब “समाज” का हवाला देकर दबाव बनाना गलत है। उन्होंने साफ कहा कि समाज का कार्ड खेलकर सच्चाई को दबाने की कोशिश बंद होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

– मनोहर पर कसता शिकंजा; कई थानों में शिकायत की तैयारी!

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एक बड़ा वर्ग जल्द ही मनोहर के खिलाफ विभिन्न क्षेत्रों के पुलिस थानों में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी में है। ये वे लोग बताए जा रहे हैं जो लंबे समय से मनोहर के कथित तौर पर शिकार रहे हैं और जिन्होंने अपनी पूंजी उसे दी, लेकिन आज तक न तो काम मिला और न ही पैसे वापस हुए। इस बार रुख साफ नजर आ रहा है—लोग खुलकर कह रहे हैं कि मनोहर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है, ताकि समय रहते ऐसे मामलों पर रोक लगाई जा सके और आगे किसी भी ठेकेदार के साथ इस तरह की धोखाधड़ी न हो। जानकारी यह भी सामने आ रही है कि शिकायत दर्ज होने के बाद अब कई लोग एकजुट होकर मुख्यमंत्री से सख्त कार्रवाई की मांग करने की तैयारी में हैं, ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जा सके। खास बात यह है कि मामला बिगड़ता देख मनोहर अब जिन-जिन लोगों के पैसे बकाया हैं, उन्हें फोन कर पैसे वापस लेने के लिए कह रहा है, जिससे यह चर्चा तेज हो गई है कि वह शिकायतों को रोकने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, पीड़ित ठेकेदारों का कहना है कि इस बार मामला दबने वाला नहीं है और केवल पैसे लौटाने से बात खत्म नहीं होगी। ठेकेदारों का साफ कहना है कि यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में ऐसे और मामले सामने आ सकते हैं। अब सबकी नजर प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।


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