– अब सामान्य वर्ग की सीटों पर दावा नहीं कर पाएंगे आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार!
मुंबई :- महाराष्ट्र की राजनीति और आरक्षण व्यवस्था में अब बड़ा बदलाव होने जा रहा है… कैबिनेट बैठक में ऐसा फैसला लिया गया है, जिसने लाखों उम्मीदवारों की चिंता बढ़ा दी है। अब आरक्षण का लाभ लेने वालों के लिए सामान्य वर्ग का रास्ता बंद होने वाला है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में लिया गया यह फैसला सरकारी नौकरियों और शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है।
महाराष्ट्र की राजनीति और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आरक्षण नियमों को लेकर एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला लिया गया है। सरकार के नए आदेश के बाद अब आरक्षण का लाभ लेने वाले उम्मीदवार सामान्य वर्ग की सीटों के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे।
अब तक के नियमों के अनुसार, यदि आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार मेरिट में सामान्य वर्ग के बराबर या उससे अधिक अंक लाता था, तो उसे ‘ओपन कैटेगरी’ की सीट मिल जाती थी। लेकिन नए निर्णय के अनुसार, यदि किसी उम्मीदवार ने आयु सीमा, शैक्षणिक योग्यता या परीक्षा के अवसरों में किसी भी प्रकार की छूट ली है, तो उसकी नियुक्ति केवल उसकी आरक्षित श्रेणी में ही होगी। ऐसे उम्मीदवार चाहे जितने भी अधिक अंक प्राप्त कर लें, वे सामान्य श्रेणी की सीट पर दावा नहीं कर सकेंगे।
सरकार के इस निर्णय को ‘क्रीमी लेयर’ और ‘मेरिट’ के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इस फैसले से आरक्षण की पूरी गणित बदल सकती है। इस फैसले के बाद सामान्य वर्ग की सीटें केवल उन लोगों के लिए सुरक्षित हो जाएंगी जिन्होंने किसी भी स्तर पर आरक्षण का लाभ नहीं लिया है। यह आदेश राज्य सरकार की सभी आगामी भर्तियों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा। प्रशासन को जल्द ही इस संबंध में विस्तृत जीआर जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य में पहले ही अनुसूचित जाती में वर्गीकरण को लेकर माहौल है। कई सामाजिक संगठन सहित सत्ता और विपक्ष के विधायक इसके खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। वहीं अब इस निर्णय से नया विवाद खड़ा हो सकता है। वहीं अब यह भी देखना है विपक्ष इसपर क्या भूमिका लेता है।