नागपुर :- शहर के सबसे पुराने हिस्से भोईपुरा में स्थित थोक मछली बाजार तीन दशकों से अधिक समय से नए स्थान की प्रतीक्षा कर रहा है. थोक मछोली विक्रेता संघ 1984 से इस बाजार के आधुनिकीकरण और मेयो अस्पताल के सामने भोईपुरा क्षेत्र में एक आधुनिक थोक बाजार के निर्माण के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है. हालांकि, प्रशासनिक उदासीनता के कारण ये मांगें अभी तक पूरी नहीं हो पाई हैं.
भोईपुरा स्थित इस मछली बाजार का महत्व केवल नागपुर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है. यहां मुंबई, आंध्र प्रदेश और ओडिशा से समुद्री मछली आती है. विदर्भ के विभिन्न भागों से ताजे पानी की मछली आती है.
थोक मछली बाजार विक्रेता संघ ने तत्कालीन मत्स्य मंत्री डॉ. नितिन राउत और महाराष्ट्र मत्स्य विकास निगम के अध्यक्ष अशोक बर्वे की मदद से राष्ट्रीय मत्स्य विकास निगम से 3.5 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत कराई थी. नगर निगम को यह धनराशि प्राप्त हुई. हालांकि, थोक मछली बाजार के लिए यह धनराशि मिलने के बावजूद, नगर निगम ने 2०12-13 में मंगलवारी बाजार स्थल पर खुदरा मछली बाजार के लिए 1०8 स्टॉल बना दिए. संगठन ने बताया कि इन स्टॉलों को ध्वस्त करके थोक विक्रेताओं के लिए उपयुक्त एक भव्य थोक बाजार बनाने की लगातार मांग अभी तक पूरी नहीं हुई है.
यहां से आगे, मछली बड़ी मात्रा में रेल द्वारा कोलकाता, पंजाब और दिल्ली के साथ-साथ मध्य प्रदेश भेजी जाती है. विक्रेताओं ने आधुनिक मछली बाजार की मांग करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी. न्यायालय ने बाजार उपलब्ध कराने का आदेश दिया था, लेकिन इसका पालन न होने पर 1993 में दोबारा याचिका दायर की गई.
सर्वेक्षण के बाद अदालत को सूचित किया गया कि कॉटन मार्केट के पास शक्ति नाले केनजदीक डेढ़ एकड़ जमीन उपयुक्त है. हालांकि, बाद में नगर निगम ने कहा कि वह जमीन नहीं दी जा सकती. फिर कांजी हाउस के पास दो एकड़ जमीन का विकल्प सामने आया. दस साल तक प्रयास करने के बाद, नगर निगम ने अदालत को बताया कि यह जमीन भी देना संभव नहीं है. 2००9 में, उच्च न्यायालय ने मंगलवारी बाजार में स्थित जमीन देने का आदेश दिया था.