– ग्राम सचिव पर बिल पास करने का दबाव, चोपा ग्राम पंचायत में मनमानी का आरोप
यासीन शेख,गोरेगांव :- तहसील के ग्राम चोपा में 15वें वित्त आयोग की निधि को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। गांव के गांधी चौक में लाखों रुपये की लागत से आरओ फिल्टर मशीन स्थापित किए जाने के मामले में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि इस कार्य के लिए न तो ग्राम पंचायत में कोई प्रस्ताव (ठराव) पारित किया गया और न ही किसी प्रकार की निविदा प्रक्रिया अपनाई गई।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में 15 वें वित्त आयोग की लगभग 3 लाख 70 हजार रुपये की निधि से गांधी चौक पर आरओ फिल्टर मशीन लगाई गई। कार्य नियोजन के अनुसार मशीन के लिए स्वयं की बोरवेल प्रस्तावित थी, लेकिन चोपा में ठेकेदार द्वारा पैसा बचाने के चक्कर में यह मशीन सार्वजनिक कुएं पर स्थापित कर दी गई।
तत्कालीन ग्राम सचिव ओ.जी. बिसेन ने बताया कि इस कार्य को लेकर ग्राम पंचायत में कोई ठराव नहीं लिया गया और न ही निविदा जारी की गई। वहीं ग्राम सरपंच अनिता मरसकोल्हे ने भी कहा कि उन्हें इस कार्य की जानकारी नहीं है। इसके बावजूद कुछ ग्राम पदाधिकारियों की मनमानी से लाखों रुपये खर्च कर आरओ प्लांट का निर्माण कर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार आरओ मशीन से संबंधित सामग्री की खरीदी सरकारी पोर्टल GeM के माध्यम से किए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन वहां भी नियमानुसार निविदा प्रक्रिया आवश्यक होती है, जो नहीं अपनाई गई।
ग्राम सचिव पर बिल निकालने का दबाव
इस मामले को लेकर वर्तमान ग्राम सचिव सुरेश कुमार रहांगडाले ने कहा कि कार्य को कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन दस्तावेजी प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण अब तक बिल पारित नहीं किया गया है।
उन्होंने बताया कि उनके पदभार संभालने से पहले ही आरओ मशीन स्थापित की जा चुकी थी और ग्राम पंचायत में इस कार्य से संबंधित कोई ठोस दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। नियमों के अनुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं होने से बिल निकालने में कठिनाई हो रही है।
रहांगडाले ने यह भी कहा कि बिल पारित करने के लिए उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन जब तक सभी दस्तावेज और प्रक्रिया नियमानुसार पूरी नहीं होती, तब तक भुगतान नहीं किया जाएगा।
ग्राम पंचायत में इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जिसके चलते गांव के कई विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।