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पतंजलि से संबंधित दवाओं का बड़ा स्टॉक जब्त, भ्रामक विज्ञापनों पर FDA की सख्त कार्रवाई

– महाराष्ट्र के सात जिलों में छापेमारी; 73 लाख रुपये से अधिक मूल्य की दवाएं जब्त

नागपुर :- खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के आयुक्त तुकाराम मुंढे के पदभार संभालने के बाद विभाग ने जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त अभियान शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में महाराष्ट्र के सात जिलों में स्थित 12 आयुर्वेदिक दवा विक्रेताओं और प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करते हुए 73 लाख 24 हजार 656 रुपये मूल्य का संदिग्ध दवा स्टॉक जब्त किया गया है। भ्रामक और गुमराह करने वाले दावों के साथ बेची जा रही दवाओं के खिलाफ यह बड़ी कार्रवाई की गई है।

नागपुर में पतंजलि से जुड़ी दवाएं जब्त

शुक्रवार को एफडीए अधिकारियों ने नागपुर जिले के येरला क्षेत्र स्थित एक पैकिंग यूनिट पर छापा मारा। इस दौरान पतंजलि समूह से संबद्ध दिव्य फार्मेसी द्वारा निर्मित दवाओं का बड़ा स्टॉक जब्त किया गया। जब्त दवाओं की कुल कीमत 7.26 लाख रुपये से अधिक बताई गई है। यह कार्रवाई आयुक्त तुकाराम मुंढे के निर्देश पर नागपुर औषधि शाखा द्वारा सह आयुक्त मिलिंद ढोबलेकर के मार्गदर्शन में की गई।

भ्रामक दावों के चलते कार्रवाई

जब्त की गई दवाओं में न्यूरोग्रिट गोल्ड, मेमोरीग्रीट, मधुग्रिट, मेलानोग्रिट, सिस्टोग्रिट और नारीकांची जैसी दवाएं शामिल हैं। इन उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापनों में मधुमेह, मोटापा, त्वचा रोग तथा अन्य गंभीर बीमारियों के पूर्ण उपचार का दावा किया गया था। एफडीए के अनुसार, ऐसे दावे उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले हैं और नियमों का उल्लंघन करते हैं।

जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

आयुक्त तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया है कि जनता के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या धोखाधड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भ्रामक विज्ञापन, अवैध उत्पादन और नियमों के विरुद्ध दवा बिक्री करने वालों के खिलाफ आगे भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में शामिल किसी भी व्यक्ति या संस्था को प्रशासन की ओर से कोई राहत नहीं दी जाएगी।

राज्यभर में विशेष अभियान जारी

एफडीए ने राज्यभर में भ्रामक विज्ञापनों और संदिग्ध दवा स्टॉक पर नजर रखने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। नागपुर में की गई यह कार्रवाई भविष्य में और व्यापक स्तर पर होने वाली जांच और छापेमारी की ओर संकेत करती है। एफडीए ने नागरिकों से अपील की है कि वे दवाओं के विज्ञापनों में किए जाने वाले चमत्कारी या अतिरंजित दावों पर आंख मूंदकर विश्वास न करें। किसी भी दवा का उपयोग करने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य लें, क्योंकि भ्रामक दावे स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।


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