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बाल मृत्यु के हर कारण का होगा खुलासा, 2030 लक्ष्य को लेकर सरकार ने कसी कमर

 – अब हर बाल मृत्यु की 24 घंटे में देनी होगी सूचना, सरकार का सख्त आदेश

 नागपुर :- बाल मृत्यु दर कम करने तथा हर बाल मृत्यु के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में ० से 5 वर्ष आयु वर्ग के प्रत्येक बच्चे की मृत्यु की जानकारी 24 घंटे के भीतर स्थानीय सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्था को देना होगा। जिले के सभी निजी अस्पतालों, प्रसूति गृहों, अस्पतालों तथा मल्टीस्प्शियालिटी अस्पतालों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है। निर्धारित अवधि में सूचना नहीं देने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

हॉस्पिटल समय पर नहीं देते जानकारी : निजी अस्पतालों से समय पर और सटीक जानकारी नहीं मिलने के कारण वास्तविक आंकड़ों में अंतर सामने आ रहा था। इसी समस्या को दूर करने के लिए सभी निजी स्वास्थ्य संस्थानों का एचएमआईएस प्रणाली पर पंजीकरण करना अनिवार्य किया गया है। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि जिन निजी अस्पतालों का अभी तक एचएमआईएस प्रणाली में मैपिंग नहीं हुआ है, वे जिला स्वास्थ्य अधिकारी, जिला शल्य चिकित्सक अथवा मनपा के चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी से तत्काल यूजर आईडी और पासवर्ड प्राप्त करें। साथ ही प्रत्येक माह का मृत्यु संबंधी विवरण नजदीकी सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्था को उपलब्ध कराएं।

बाल मृत्यु दर कम करने की पहल : केंद्र सरकार के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के तहत वर्ष 2030 तक नवजात शिशु मृत्यु दर और पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर को कम करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में राज्य में नवजात व बालमृत्यु दर में कमी दर्ज की गई है। नवजात मृत्यु दर 11 तथा पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर 16 तक है। बावजूद सरकार बाल मृत्यु के प्रत्येक मामले का विश्लेषण कर रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने की तैयारी कर रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में बाल मृत्यु की जानकारी सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) तथा हेल्थ मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस-आईएचआईपी) में नियमित रूप से दर्ज की जाती है।

निजी अस्पतालों के लिए नई रिपोर्टिंग व्यवस्था अनिवार्य

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सटीक आंकड़े उपलब्ध होने पर बाल मृत्यु के जोखिम कारकों, उपचार में हुई देरी, रेफरल प्रणाली की खामियों तथा उपचार संबंधी कमियों की पहचान करना आसान होगा। इसके आधार पर बाल मृत्यु के मामलों को कम करने के लिए प्रभावी रणनीति बनाई जा सकेगी। राज्य सरकार ने स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन को निजी अस्पतालों के कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण देने के भी निर्देश जारी किए हैं।


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