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एसआईआर और जनगणना की ड्यूटी बनी परेशानी

– शिक्षकों की कमी से बढ़ी चिंता, पहले ही दिन स्कूलों के सामने बड़ी चुनौती

– दोहरी जिम्मेदारी के बीच फंसे शिक्षक

मोर्शी :- मंगलवार से स्कूल की घंटी बजने वाली है। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होने जा रही है, लेकिन राज्य की कई स्कूलों के सामने गंभीर समस्याएं खड़ी होने की आशंका है। पहले से ही अधिकांश स्कूलों में शिक्षकों की संख्या कम है, वहीं उपलब्ध शिक्षकों में से बड़ी संख्या को एसआईआर और जनगणना के कार्यों में लगाया गया है। इस कारण कई स्कूलों में आधे से अधिक शिक्षक अनुपस्थित रहेंगे, जिससे नियमित पढ़ाई, विद्यार्थियों की देखरेख, अनुशासन और सुरक्षा पर असर पड़ने की संभावना है। ऐसे में स्कूलों को सुचारू रूप से चलाना मुख्याध्यापकों और स्कूल प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। एक ओर सरकार के महत्वपूर्ण एसआईआर और जनगणना कार्य हैं, तो दूसरी ओर विद्यार्थियों की शिक्षा और अभिभावकों की अपेक्षाएं। इस दोहरी जिम्मेदारी के बीच शिक्षक वर्ग फंसा हुआ है। स्कूल की पढ़ाई प्रभावित होने पर अभिभावकों और प्रबंधन का दबाव झेलना पड़ रहा है। इस स्थिति में विद्यार्थियों की शैक्षणिक हानि रोकने के लिए एसआईआर जैसे कार्यों हेतु अलग से शिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियों की नियुक्ति की मांग जोर पकड़ रही है। शिक्षकों, मुख्याध्यापकों, अभिभावकों और शिक्षा प्रेमियों ने सरकार से जल्द उचित निर्णय लेने की अपेक्षा जताई है।

मुख्याध्यापक श्रीकांत देशमुख के मुताबिक सरकारी कार्य महत्वपूर्ण हैं, लेकिन विद्यार्थियों की शिक्षा की कीमत पर नहीं होने चाहिए। पहले से शिक्षकों की कमी है और ऐसे में एसआईआर व जनगणना के लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति से स्कूलों का संचालन कठिन हो गया है। विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार को अलग से मानवबल उपलब्ध कराना चाहिए।

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