spot_imgspot_img

Top 5 This Week

spot_img

ग्रामीण आरटीओ में रोटेशन नीति का खेला

– फ्लाइंग स्क्वाड में महीनों से एक ही निरीक्षकों की तैनाती

नागपुर :- नागपुर ग्रामीण क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में मोटर वाहन निरीक्षकों (एमवीआई) की फ्लाइंग स्क्वाड ड्यूटी में रोटेशन नीति का पालन नहीं किए जाने के आरोप सामने आ वए हैं। आरोप है कि महाराष्ट्र परिवहन आयुक्त के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कुछ निरीक्षकों को लगातार कई महीनों से फ्लाइंग स्क्वाड में तैनात रखा गया है, जबकि अन्य अधिकारियों को यह जिम्मेदारी नहीं दी जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हेमंत सोलंकर मार्च 2026 से लगातार जुलाई 2026 तक पिछले पांच महीनों से फ्लाइंग स्क्वाड में कार्यरत हैं। वहीं, कलबीर सिंह कलसी अप्रैल 2026 से लगातार चार महीनों से इसी ड्यूटी पर तैनात हैं। इसके अलावा विनोद हीरे भी पिछले तीन महीनों से लगातार फ्लाइंग स्क्वाड की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। आरोप है कि परिवहन आयुक्त द्वारा भ्रष्टाचार और एकाधिकार रोकने के उद्देश्य से फ्लाइंग स्क्वाड में अधिकारियों का नियमित रोटेशन अनिवार्य किया गया है, लेकिन नागपुर ग्रामीण आरटीओ में इस व्यवस्था का पालन नहीं हो रहा है। सूत्रों का दावा है कि कुछ चुनिंदा अधिकारियों को लगातार फ्लाइंग स्क्वाड में बनाए रखने से अन्य अधिकारियों को अवसर नहीं मिल रहा है। कुछ कर्मचारियों का आरोप है कि इससे विभाग में पारदर्शिता प्रभावित हो रही है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जानकारी के अनुसार, इससे पहले नागपुर शहर आरटीओ में भी फ्लाइंग स्क्वाड में लंबे समय तक एक ही अधिकारियों की तैनाती को लेकर सवाल उठ चुके हैं। अब ग्रामीण आरटीओ में भी इसी प्रकार की स्थिति सामने आने का दावा किया जा रहा है। इस मामले को लेकर कुछ कर्मचारियों और नागरिकों ने मंत्रालय तथा विजिलेंस स्तर पर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि रोटेशन नीति का उल्लंघन हुआ है, तो इसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल, इस संबंध में नागपुर ग्रामीण आरटीओ प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


Click above on our news logo to access the Daily E_Newspaper.
For articles or advertisements, contact us at: dineshdamahe86@gmail.com.

Copyright Disclaimer: If Any Image, video or article belongs to its respective owner/creator. Full credit goes to the original creator. No copyright infringement intended.